भारतवंशियों ने भारत भेजा 135 अरब डॉलर
नई दिल्ली । जेस्क: वित्त वर्ष 2024 में एनआरआई ने भारत को रिकॉर्ड 135.46 अरब डॉलर भेजे, जो अब तक की सबसे बड़ी रकम है. इसके साथ ही भारत लगातार 10वें साल दुनिया का सबसे ज्यादा रेमिटेंस पाने वाला देश बन गया है.
भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, एनआरआई द्वारा भेजे गये पैसे, जिन्हें ‘प्राइवेट ट्रांसफर’ कहा जाता है, में 14 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इसका मुख्य कारण अमरीका, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों में भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स की बढ़ती संख्या है. इन देशों से कुल रेमिटेंस का लगभग 45 फीसदी हिस्सा आता है.
सिर्फ सात साल पहले, 2016-17 में भारत को 61 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली थी. अब यह रकम दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी है. यह राशि भारत के कुल करंट अकाउंट इनफ्लो का 10 फीसदी से अधिक है, जो पिछले वित्त वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा.
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता के अनुसार, क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट के बावजूद रेमिटेंस में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई. इसका कारण है कि भारतीय स्किल्ड वर्कर्स अब विकसित देशों में बड़ी संख्या में जा रहे हैं. खाड़ी देशों का योगदान तेल की कीमतों पर निर्भर होने के कारण कम हुआ है.
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत 135.46 अरब डॉलर के साथ शीर्ष पर है, जबकि मैक्सिको (68 अरब डॉलर) और चीन (48 अरब डॉलर) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
रेमिटेंस वह राशि है जो विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने परिवारों को भेजते हैं. यह रकम मुख्य रूप से घरेलू खर्चों और एनआरआई डिपॉजिट अकाउंट से निकासी के रूप में आती है. यह न केवल भारत के ट्रेड डिफिसिट (287 अरब डॉलर) का 47 फीसदी हिस्सा कवर करती है, बल्कि फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट से भी ज्यादा स्थिर और मजबूत वित्तीय सहारा प्रदान करती है.