अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होगा भारत
तेहरान । डेस्क: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सहित दुनिया भर के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और शासनाध्यक्ष शामिल होने जा रहे हैं. ईरानी सरकारी मीडिया आईआरआईबी (IRIB) के अनुसार, इस विशाल और ऐतिहासिक शोक सभा की शुरुआत शुक्रवार से हो रही है. गौरतलब है कि 86 वर्षीय खामेनेई की मौत पिछले दिनों उनके परिसर पर हुए एक संयुक्त अमेरिका-इजरायल हवाई हमले में हो गई थी. युद्ध की परिस्थितियों के कारण मार्च में होने वाले उनके अंतिम संस्कार को टालना पड़ा था, जो अब आयोजित किया जा रहा है.
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे गवर्नर सैयद अता हसनैन और उप विदेश मंत्री:
इस ऐतिहासिक राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंच रहा है. भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत का प्रतिनिधित्व बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और उप विदेश मंत्री पबित्र मार्गेरिटा करेंगे. पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन वर्तमान में भारत में सार्वजनिक पद संभालने वाले सबसे वरिष्ठ शिया अधिकारी हैं. भारतीय प्रतिनिधिमंडल में विपक्षी नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद के साथ-साथ महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं, जो शुक्रवार को ईरान के लिए रवाना होंगे.
पाकिस्तान, रूस और चीन सहित इन देशों के दिग्गज भी होंगे शामिल:
पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ इस राजकीय अंतिम संस्कार में हिस्सा लेंगे. पाकिस्तान ने इस पूरे संकट के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिससे अप्रैल में संघर्षविराम और जून में एक महत्वपूर्ण समझौते का रास्ता साफ हुआ था. पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी पहले ही तेहरान पहुंच चुके हैं.
इसके अलावा, तजाकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान और जॉर्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कवेलाशविली भी इस समारोह में शामिल होने के लिए ईरान पहुंच रहे हैं. वहीं, रूस की ओर से सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव, चीन के संसद के शीर्ष नेता हे वेई, और तुर्की के उपराष्ट्रपति जेवदत यिलमाज़ अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करेंगे.
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी और उप प्रधानमंत्री अब्दुल गनी बिरादर भी इस आयोजन का हिस्सा बनने तेहरान पहुंचे हैं, जबकि बांग्लादेश की ओर से संसद अध्यक्ष हाफिज उद्दिन अहमद शामिल होंगे.
सात दिनों तक चलेगा शोक, इराक और ईरान के कई शहरों से गुजरेगा काफिला:
ईरान में यह आयोजन आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कारों में से एक होने जा रहा है. अधिकारियों का अनुमान है कि यह साल 1989 में हुए आयतुल्ला रुहोल्लाह खमैनी के अंतिम संस्कार से भी बड़ा हो सकता है, जिसमें करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे.
शुक्रवार को तेहरान में मुख्य आयोजन के बाद शनिवार और रविवार को खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों के शवों को जनता के दर्शन के लिए ईरान के सबसे बड़े प्रार्थना परिसरों में से एक, ग्रैंड मोसल्ला में रखा जाएगा. इसके बाद सोमवार और मंगलवार को यह शवयात्रा दक्षिण में पवित्र शहर कोम की तरफ बढ़ेगी.
बुधवार को इराक के नजफ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक आधिकारिक स्वागत के बाद नजफ और करबला जैसे पवित्र शहरों में विशाल जुलूस निकाले जाएंगे. अंत में, शव को वापस ईरान लाया जाएगा और शुक्रवार को उनके जन्मस्थान, पूर्वोत्तर शहर मश्हद में स्थित इमाम रजा के पवित्र धर्मस्थल में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.
सुरक्षा कारणों से सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई रहेंगे दूर, सेना ने दी चेतावनी:
इस महा-आयोजन के बीच ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता और खामेनेई के बेटे, मोजतबा खामेनेई सुरक्षा कारणों से अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे. भारत में उनके प्रतिनिधि ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि इजरायल की ओर से मोजतबा खामेनेई को निशाना बनाने की हालिया धमकियों के बाद यह फैसला लिया गया है.
इस बीच, ईरान के सैन्य नेतृत्व ने किसी भी तरह की संभावित गड़बड़ी को लेकर सख्त रुख अपनाया है. खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के कमांडर अली अब्दुल्लाही ने सरकारी मीडिया के माध्यम से अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी जारी की है. उन्होंने कहा है कि ईरान के इस संवेदनशील समय में दुश्मन किसी भी तरह की गलतफहमी या दुस्साहस से बचे, अन्यथा ईरानी सशस्त्र बल बेहद कड़ा और विनाशकारी जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.