भारत-पाक मैच पर बरसा विपक्ष
नई दिल्ली | डेस्क: एशिया कप 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है. विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं कि आतंकवाद और क्रिकेट एक साथ कैसे चल सकते हैं.
भारत और पाकिस्तान की टीमें रविवार को दुबई में आमने-सामने होंगी. पहलगाम हमले के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला मुकाबला होगा. कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, एआईएमआईएम और शिवसेना समेत कई विपक्षी दल इस मैच का विरोध कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी मैच के बहिष्कार की मांग तेज़ है.
एआईएमआईएम के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,“असम और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से मेरा सवाल है कि जिस पाकिस्तान ने पहलगाम में हमारे 26 लोगों को मज़हब पूछकर गोली मारी, तुममें इतनी ताक़त नहीं है कि पाकिस्तान से क्रिकेट मैच खेलने से रोक सको? प्रधानमंत्री से भी पूछना चाहता हूं, जब आपने कहा था कि ‘ख़ून और पानी साथ नहीं बह सकते, बातचीत और आतंकवाद साथ नहीं चल सकते’, तो अब क्रिकेट से बीसीसीआई को कितने पैसे मिलेंगे- दो हज़ार करोड़ या तीन हज़ार करोड़? क्या पैसों की क़ीमत 26 शहीदों की जान से ज़्यादा है?”
ओवैसी ने साफ किया कि वे पहलगाम हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के साथ खड़े हैं.
बीजेपी नेता दिलीप घोष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति करार दिया. उन्होंने कहा कि मैच तो कांग्रेस के ज़माने में भी होते थे. पाकिस्तान के कलाकार यहां आकर सालों तक पैसा कमाते रहे, तब किसी ने विरोध नहीं किया. आज अचानक क्रिकेट को राजनीति से क्यों जोड़ा जा रहा है? भारत पाकिस्तान जाकर नहीं खेलता, वर्ल्ड कप में भी नहीं गया था, ये हमारा स्टैंड है.
इस बीच अभिनेता सुनील शेट्टी ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है. खिलाड़ी सिर्फ देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. यह पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला है कि किसी को मैच देखना है या नहीं. आप खिलाड़ियों को दोष नहीं दे सकते. आयोजन बीसीसीआई के हाथ में नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के तहत होता है.
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पहलगाम में हमारी बहनों का सिंदूर उजाड़ा गया, उसके बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हुआ. सरकार ने खुद कहा था कि यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है. प्रधानमंत्री ने ही कहा था कि ‘ख़ून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’, ‘ट्रेड और टेरर साथ नहीं चल सकते’, तो फिर सवाल यह है कि खून और खेल कैसे साथ चल सकते हैं?