नेपाल से चाय निर्यात पर भारत ने दी बड़ी राहत
काठमांडू । डेस्क: भारत सरकार ने नेपाल से होने वाले चाय निर्यात की राह में आ रही बड़ी बाधाओं को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा जारी एक हालिया सर्कुलर के अनुसार, अब भारत में घरेलू खपत के लिए आयात की जाने वाली नेपाली चाय के लिए एक नई जोखिम-आधारित परीक्षण प्रणाली (रिस्क-बेस्ड टेस्टिंग सिस्टम) को मंजूरी दी गई है.
यह ऐतिहासिक फैसला भारत के वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया गया है, जिसके बाद नेपाल के चाय उत्पादकों और निर्यातकों ने बड़ी राहत की सांस ली है.
नए नियमों के तहत, भारत की सीमाओं पर आने वाली चाय की कुल खेपों में से केवल 20 प्रतिशत खेपों की ही रैंडम तरीके से जांच की जाएगी. इसका सीधा मतलब यह है कि पांच में से केवल एक खेप को ही परीक्षण के लिए रोका जाएगा, जबकि बची हुई अन्य चार खेपों को सामान्य सीमा शुल्क और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद तेजी से फूड-सेफ्टी क्लीयरेंस मिल जाएगा.
यह व्यवस्था उन भारतीय प्रवेश बिंदुओं पर भी तुरंत लागू कर दी गई है जहां FSSAI के स्थायी कर्मचारी तैनात नहीं हैं. इस कदम से सीमा पर होने वाली देरी, गोदामों के भारी-भरकम खर्च और नेपाली व्यापारियों के बीच बनी अनिश्चितता काफी हद तक कम होने की उम्मीद है.
इससे पहले, जून के मध्य में भारत ने नेपाल से आने वाली चाय की प्रत्येक खेप के लिए गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य कर दिया था. इस सख्त नियम के कारण नेपाल के इलाम में 53 और झापा में 30 चाय फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह या आंशिक रूप से ठप हो गया था.
इस गंभीर संकट को देखते हुए नेपाल सरकार ने भारत के साथ कूटनीतिक बातचीत शुरू की थी और एक विशेष कार्यबल का गठन भी किया था. अधिकारियों के अनुसार, इस नए फैसले से जहां एक तरफ निर्यातकों की लागत और समय बचेगा, वहीं दूसरी तरफ FSSAI के मानकों को पूरा करने वाले व्यापारियों के लिए भारतीय बाजार का रास्ता हमेशा खुला रहेगा.
हालांकि, इस राहत के बावजूद नेपाल के कुछ बड़े चाय निर्यातकों के मन में इस व्यवस्था की निरंतरता को लेकर अब भी संदेह बना हुआ है. नेपाल चाय उत्पादक संघ के अध्यक्ष आदित्य पराजुली का कहना है कि भारत द्वारा आयात नियमों में बार-बार किए जाने वाले बदलावों के कारण नेपाली उद्यमियों को हमेशा संकट का सामना करना पड़ता है.
उन्होंने नेपाल सरकार से आग्रह किया है कि वह नई दिल्ली के साथ निरंतर कूटनीतिक संपर्क बनाए रखे ताकि भविष्य में किसी भी तरह की रुकावट न आए.
फिलहाल, नेपाल में सालाना 27,000 टन से अधिक चाय का उत्पादन होता है और इस नए आदेश के बाद सोमवार से भारत को चाय का निर्यात दोबारा शुरू होने जा रहा है, जिससे गोदामों में फंसी करीब 1,800 टन चाय की सुरक्षित डिलीवरी का रास्ता साफ हो सकेगा.