इंडिया गठबंधन उपराष्ट्रपति चुनाव लड़ेगा
नई दिल्ली । डेस्क: विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) ने उपराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. इसके बावजूद कि उनके पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या न हो. यह निर्णय गुरुवार को कांग्रेस के लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मेजबानी में आयोजित एक डिनर बैठक में लिया गया.
यह 14 महीनों में इंडिया गठबंधन की पहली आमने-सामने की बैठक थी, इससे पहले अंतिम बैठक 1 जून, 2024 को हुई थी.
चुनाव आयोग ने गुरुवार को उपराष्ट्रपति चुनाव की अधिसूचना जारी की, जिसमें नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त निर्धारित की गई है.
बैठक में गठबंधन के नेताओं ने बिहार में चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के मुद्दे पर भी चर्चा की और 10 अगस्त से इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने का फैसला किया.
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव ने बताया कि बिहार में मतदाता सूची में कई खामियां हैं, जिसके विरोध में 1 सितंबर को एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी.
बैठक में राहुल गांधी ने 30 मिनट का एक प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें उन्होंने दिन में पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस की बातें साझा कीं. तेजस्वी यादव ने बिहार में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में खामियों को उजागर किया.
इसके अलावा, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने और विधानसभा की रिक्त सीटों को भरने की मांग उठाई. उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा किताबों पर प्रतिबंध के आदेश का भी विरोध करने का आह्वान किया.
उपराष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा के लिए एक विशेष बंद कमरे की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की लोकसभा नेता के. कनिमोझी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले शामिल थे.
एक नेता ने बताया कि गठबंधन अपने उम्मीदवार का चयन बीजेपी के उम्मीदवार की घोषणा के बाद करेगा. उन्होंने कहा, “हमारा संघर्ष संविधान को बचाने के लिए है, जो इस सरकार के तहत खतरे में है. इसलिए हमारा उम्मीदवार ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, चाहे वह राजनेता हो या विद्वान, जो इस वैचारिक लड़ाई का प्रतीक हो.”