बुजुर्गों की सेवा नहीं तो गिफ्ट की गई संपत्ति होगी वापस: HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक अपने किसी रिश्तेदार को इस उम्मीद में संपत्ति उपहार में देता है कि वह उसकी देखभाल करेगा, और बाद में वह रिश्तेदार अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट जाता है, तो उस उपहार विलेख को रद्द किया जा सकता है.
न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने एक रिट याचिका को खारिज करते हुए कहा कि भले ही गिफ्ट डीड में देखभाल करने की शर्त लिखित रूप में न हो, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में यह एक 'निहित शर्त' (Implied Condition) मानी जाएगी.
यह मामला एक वरिष्ठ नागरिक दंपति से जुड़ा है जिन्होंने अपने एक करीबी रिश्तेदार के पक्ष में अपना घर इस भरोसे पर गिफ्ट कर दिया था कि वे उनकी देखभाल करेंगे.
हालांकि, बाद में उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा और बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित कर दिया गया.
जब मामला मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल पहुँचा, तो ट्रिब्यूनल ने गिफ्ट डीड को शून्य घोषित कर संपत्ति वापस बुजुर्गों को सौंपने का आदेश दिया.
इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहाँ दलील दी गई कि गिफ्ट डीड में सेवा करने की कोई लिखित शर्त नहीं थी.
हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 एक कल्याणकारी कानून है.
यदि संपत्ति प्रेम और विश्वास के आधार पर दी गई है और बाद में बुजुर्गों के साथ क्रूरता की जाती है, तो इसे 'अनुचित प्रभाव' के तहत किया गया हस्तांतरण माना जाएगा और कानून के तहत ट्रिब्यूनल को ऐसी रजिस्ट्री रद्द करने का पूरा अधिकार है.