मिसाइल हमलों पर IDF एयर डिफेंस चीफ: "तकनीकी तंत्र है, गलतियाँ संभव हैं"
नई दिल्ली । डेस्क: यरुशलम पोस्ट के हवाले से खबर है कि इजरायल के हवाई रक्षा तंत्र के चीफ ऑफ स्टाफ कर्नल एल. ने डिमोना और अराद में हाल ही में हुए विनाशकारी मिसाइल हमलों के बाद स्वीकार किया है कि उनका दुनिया का सबसे उन्नत रक्षा तंत्र भी 'पूर्ण' या 'हर्मेटिक' नहीं है. इन हमलों में 100 से अधिक लोग घायल हुए और व्यापक स्तर पर संपत्ति का नुकसान हुआ, जिसके बाद इजरायली रक्षा बलों (IDF) के भीतर और नागरिक स्तर पर प्रणालियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं.
कर्नल एल. और उनके साथ सिस्टम रिसर्च डिवीजन के प्रमुख मेजर ए. ने इस युद्ध की जटिलताओं, तकनीकी सीमाओं और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की.
कर्नल एल., जो केवल एक वर्ष से इस पद पर हैं और स्वयं एक वैमानिकी इंजीनियर हैं, ने स्पष्ट किया कि किसी भी तकनीकी प्रणाली में खामियों की गुंजाइश होती है और अराद तथा डिमोना की घटनाएं इसी तकनीकी सीमा का परिणाम थीं.
उन्होंने बताया कि इजरायल का रक्षा कवच तीन अलग-अलग प्रणालियों का एक जटिल मिश्रण है जो रडार और इंटरसेप्शन के माध्यम से काम करता है, लेकिन भीषण गोलाबारी और लंबी अवधि तक चलने वाले युद्ध में कभी-कभी 'लीकेज' या चूक होना संभव है.
इस महत्वपूर्ण साक्षात्कार के दौरान शिरली गोलान द्वारा पूछे गए तीखे सवालों और सैन्य अधिकारियों के जवाबों के मुख्य अंश कुछ इस प्रकार रहे.
शिरली गोलान ने पूछा कि क्या डिमोना और अराद के मामले में सिस्टम में कोई 'ब्लाइंड स्पॉट' था? इसके जवाब में कर्नल एल. ने कहा कि हम इसे ब्लाइंड स्पॉट नहीं कह सकते. यह एक अत्यंत जटिल प्रणाली है जिसमें इंसान और मशीन दोनों शामिल हैं. हमारे पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ तकनीक है, लेकिन युद्ध की स्थितियों में सांख्यिकीय विफलताएं हो सकती हैं.
जब उनसे पूछा गया कि विनाश के दृश्यों को देखकर उन्हें कैसा लगता है, तो कर्नल एल. ने एक नागरिक और कमांडर के बीच के द्वंद्व को स्वीकार करते हुए कहा कि एक नागरिक के रूप में यह देखना कठिन है, लेकिन एक कमांडर के रूप में उन्हें उन हजारों जिंदगियों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है जिन्हें उनके तंत्र ने बचाया है. उन्होंने बताया कि अगर यह सिस्टम न होता तो सैकड़ों राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे और आबादी वाले क्षेत्र तबाह हो गए होते.
आगामी हमलों और क्लस्टर युद्ध सामग्री से सुरक्षा पर चर्चा करते हुए, मेजर ए. ने स्पष्ट किया कि वे मौजूदा अभियान में 'एरो 3' प्रणाली का बुद्धिमानी से उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी प्रणालियां एक-दूसरे से बात करती हैं और रीयल-टाइम डेटा साझा करती हैं ताकि डिमोना जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके.
बजट और संसाधनों के सवाल पर कर्नल एल. ने आश्वस्त किया कि सेना को वह सब कुछ मिल रहा है जो जीतने के लिए आवश्यक है. अमेरिकी मीडिया में आई उन खबरों पर, जिनमें दावा किया गया था कि इजरायल के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी हो रही है. कर्नल एल. ने दो टूक शब्दों में कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, रक्षा उद्योग और वायु सेना चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं और इजरायल के पास लंबी लड़ाई लड़ने के लिए पर्याप्त साधन मौजूद हैं. उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा तंत्र की सफलता की परिभाषा 'जीरो वल्नरेबिलिटी' यानी शून्य नुकसान है, और वे इसी लक्ष्य की ओर काम कर रहे हैं.
ईरान से होने वाले मिसाइल हमलों के पैटर्न पर मेजर ए. ने टिप्पणी की कि दुश्मन अपनी रणनीतियां बदल रहा है और नए सिस्टम का उपयोग कर रहा है, जिन्हें सेना लगातार ट्रैक कर रही है और अपने जवाब तैयार कर रही है.
उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध में हर चीज का अनुमान लगाना संभव नहीं है, लेकिन उनके पास सबसे सक्षम टीम है.
साक्षात्कार के अंत में, इन अधिकारियों ने अपनी व्यक्तिगत भावनाओं को भी साझा किया. कर्नल एल. ने बताया कि कैसे युद्ध के कारण उन्हें अपने परिवार के साथ स्कीइंग ट्रिप रद्द करनी पड़ी और उन्होंने अपने बेटे से वादा किया है कि युद्ध समाप्त होने के बाद वे समय निकालकर साथ जाएंगे.
मेजर ए. ने भी युद्ध खत्म होने के बाद अपनी बेटी के साथ एम्यूजमेंट पार्क जाने की इच्छा जताई.
फिलहाल, ये अधिकारी वायु सेना के बंकरों में शिफ्टों में काम कर रहे हैं, हर हमले का मिनटों के भीतर विश्लेषण कर रहे हैं ताकि अगले हमले को अधिक प्रभावी ढंग से रोका जा सके. सेना का संदेश साफ है, सुरक्षा प्रणाली दुनिया में सर्वश्रेष्ठ हो सकती है, लेकिन नागरिकों की सुरक्षा के लिए होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करना ही सबसे बड़ा बचाव है.