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हुती संकट: क्या बेअसर हुआ मक्का रक्षा समझौता?

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12 सित. 2026, 07:17 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

मक्का समझौता
मक्का समझौता

नई दिल्ली । डेस्क: यमन के हुती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण तटीय इलाकों और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास प्रमुख ठिकानों पर कब्जा करने के बाद मध्य पूर्व में तनाव नया मोड़ ले चुका है. हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के बावजूद, इस्लामाबाद ने सऊदी अरब की जमीन पर हुतियों से मुकाबला करने के लिए अपनी सेना भेजने से साफ इनकार कर दिया है.


मक्का समझौते पर बढ़ा संकट


मात्र एक महीने पहले हुए त्रिपक्षीय समझौते के तहत किसी भी एक देश पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाना तय हुआ था. हालांकि, पाकिस्तान सरकार के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सऊदी में अपनी टुकड़ियों को सीधे युद्ध में उतारने की कोई योजना नहीं है.


रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सऊदी अरब के मुख्य भूभाग पर कोई बहुत बड़ा या सीधा हमला नहीं होता, तब तक पाकिस्तान या तुर्की अपनी वायुसेना या थलसेना को इस जंग में झोंकने के मूड में नहीं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सऊदी अरब समझौते को लागू करने पर ज्यादा दबाव डालता है, तो यह त्रिपक्षीय समझौता समय से पहले ही निष्प्रभावी हो सकता है.


रेड सी का रणनीतिक संकट और अमेरिका का रुख


हुतियों ने मोचा बंदरगाह, पेरिम द्वीप और धुबाब जैसे महत्वपूर्ण इलाकों पर नियंत्रण करके सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है. इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब मार्ग पर खतरा मंडराने लगा है. होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी बाधाओं के बीच सऊदी अरब के लिए अपनी 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' के जरिए तेल निर्यात करना भी अब चुनौतीपूर्ण हो गया है.


इस संकट के बीच सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सीधे सैन्य हस्तक्षेप की अपील की, लेकिन अमेरिका ने नए सैन्य मोर्चे में शामिल होने से इनकार करते हुए केवल खुफिया और गैर-घातक सहायता देने तक सीमित रहने का फैसला किया है.


भारत पर बढ़ता आर्थिक असर


इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है. सऊदी अरब से भारत आने वाले कच्चे तेल के टैंकरों को अब रेड सी के सुरक्षित न होने के कारण अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते से यात्रा करनी पड़ रही है. इस लंबे समुद्री मार्ग के कारण मालभाड़ा और बीमा दरें काफी बढ़ गई हैं.


तेल बाजार में पहले से ही तनाव की स्थिति है और ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी से उछाल आ रहा है. यदि यह गतिरोध जारी रहता है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं.


पाकिस्तान की कूटनीतिक दुविधा


पाकिस्तान इस समय अत्यंत जटिल कूटनीतिक स्थिति से गुजर रहा है. एक तरफ जहां उस पर सऊदी अरब के प्रति रक्षा प्रतिबद्धताओं का दबाव है, वहीं दूसरी तरफ वह अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने के लिए तेहरान के साथ बातचीत में व्यस्त है.


पाकिस्तान अब सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि वह ईरान के माध्यम से हुतियों और सऊदी अरब के बीच मध्यस्थता करा सके. हालांकि, यदि हुती विद्रोही सऊदी अरब की सीमा के भीतर अपने जमीनी हमलों को और तेज करते हैं, तो पाकिस्तान के लिए इस संघर्ष से दूरी बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP