छत्तीसगढ़ के जंगलों में पक्षियों के लिए खुलेंगे 'हॉर्नबिल रेस्टोरेंट'
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल पक्षियों को बचाने और उनकी आबादी बढ़ाने के लिए एक विशेष प्राकृतिक उद्यान विकसित किया जा रहा है. जिसे 'हॉर्नबिल रेस्टोरेंट' का नाम दिया गया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य इन आकर्षक पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त भोजन और सुरक्षा उपलब्ध कराना है.
हालांकि यह प्रचार-छपास की प्रक्रिया अधिक महसूस हो रही है क्योंकि इस तरह की कोई भी परियोजना पारिस्थितकीय अध्ययन के बिना नहीं की जा सकती. इसके अलावा यह एक दीर्घकालिक योजना है, जिसके परिणाम आने वाले 10-20 सालों में नजर आ सकते हैं.
ऐसे में फिलहाल इसे महज घोषणा की तरह देखा जा रहा है.
वन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह 'हॉर्नबिल रेस्टोरेंट' कोई कृत्रिम ढांचा नहीं होगा, बल्कि वन विभाग जंगल के भीतर ही पीपल, बरगद और फाइकस जैसी प्रजातियों के फलदार वृक्षों का एक सघन क्लस्टर तैयार कर रहा है. चूँकि ये फल हॉर्नबिल का मुख्य आहार हैं, इसलिए इन वृक्षों के विकसित होने से पक्षियों को भोजन की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा और वे साल भर एक ही सुरक्षित क्षेत्र में प्रवास कर सकेंगे.
गौरतलब है कि हॉर्नबिल को 'जंगल का किसान' या 'फॉरेस्ट इंजीनियर' भी कहा जाता है. ये पक्षी फल खाने के बाद उनके बीजों को मीलों दूर तक फैलाते हैं, जिससे वनों का प्राकृतिक पुनर्जीवन और विस्तार होता है.
उदंती-सीतानदी का पहाड़ी क्षेत्र, जो समुद्र तल से लगभग 800 से 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इन पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है. आमतौर पर पश्चिमी घाट में पाए जाने वाले ये दुर्लभ पक्षी अब छत्तीसगढ़ के इन जंगलों में अपनी स्थायी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.
इस संरक्षण परियोजना के तहत केवल भोजन ही नहीं, बल्कि इनके घोंसलों की सुरक्षा के लिए भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. स्थानीय प्रशिक्षित युवाओं और विशेषज्ञों की ट्रैकिंग टीमें नियमित रूप से इनकी निगरानी कर रही हैं.
इस पहल की एक और खास कड़ी 'घोंसला गोद लेने का कार्यक्रम' है, जिसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की गई है. इससे न केवल पक्षियों का संरक्षण होगा, बल्कि क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा.
पर्यटक अब एक निश्चित और सुरक्षित दूरी से इन शानदार पक्षियों को निहार सकेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और जैव विविधता के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ेगी.