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हिंदू परिवारों कम से कम तीन बच्चे पैदा करने पर विचार करे: मोहन भागवत

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18 फ़र. 2026, 07:18 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

मोहन भागवत
मोहन भागवत

लखनऊ । डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित एक सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए. उन्होंने वैज्ञानिक तर्कों का हवाला देते हुए आगाह किया कि जिस समाज की औसत प्रजनन दर तीन से कम होती है, उसके भविष्य में विलुप्त होने का खतरा बना रहता है. 


मोहन भागवत ने कहा कि नवविवाहित जोड़ों को इस बारे में जागरूक किया जाना चाहिए कि विवाह का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति नहीं, बल्कि सृष्टि को आगे बढ़ाना है.


अपने संबोधन के दौरान उन्होंने घुसपैठियों के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए 'डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट' (पहचानें, हटाएं और निर्वासित करें) का मंत्र दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठियों को न केवल चिन्हित कर बाहर निकाला जाना चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगार भी नहीं दिया जाना चाहिए. 


जनसंख्या में असंतुलन और धर्मांतरण पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने लालच या जबरन होने वाले धर्मांतरण को रोकने और 'घर वापसी' के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने जोर देकर कहा कि यद्यपि वर्तमान में कोई तात्कालिक खतरा नहीं है, फिर भी हिंदू समाज को सतर्क रहने की जरूरत है.


सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मंदिरों, कुओं और श्मशान घाटों पर सभी हिंदुओं का समान अधिकार होना चाहिए और जाति के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. 


उन्होंने महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षित करने और उन्हें 'मातृशक्ति' के रूप में सशक्त बनाने की वकालत की. 


तकनीक के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग के प्रति अनुशासित रहने की सलाह दी. इस कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समुदायों के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों के लोग भी शामिल हुए.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP