क्या ईरान युद्ध में नेतन्याहू ने अपने संकटों का समाधान ढूंढ लिया है?
यरूशलेम । डेस्क: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वह कर दिखाया है जिसे उनके पूर्ववर्ती असंभव मानते थे. अमेरिका को ईरान के खिलाफ एक खुले युद्ध में सीधे तौर पर शामिल करना. हालांकि इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है और मध्य पूर्व में मानवीय त्रासदी को जन्म दिया है, लेकिन इजरायल के भीतर इसे नेतन्याहू की एक बड़ी रणनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है.
2026 का यह मार्च महीना न केवल क्षेत्रीय भूगोल बदल रहा है, बल्कि नेतन्याहू के डगमगाते राजनीतिक करियर को भी नई संजीवनी देता दिख रहा है. वर्तमान में जारी इस भीषण युद्ध के बीच, ईरान में 1,400 और लेबनान में 1,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया भर में राशनिंग का खतरा मंडरा रहा है.
ईरान का खतरा नेतन्याहू के राजनीतिक विमर्श का केंद्र रहा है. दशकों से वे संयुक्त राष्ट्र में पोस्टर और ग्राफिक्स के माध्यम से दुनिया को ईरानी परमाणु बम की चेतावनी देते रहे हैं. उनका मानना था कि बिना अमेरिकी सैन्य समर्थन के इजरायल ईरान को निर्णायक रूप से नहीं हरा सकता.
ट्रंप के सत्ता में आने के बाद यह सपना सच हुआ. पिछले साल के संक्षिप्त 'जून युद्ध' के बाद, इस बार अमेरिका पूरी तरह इजरायल के साथ खड़ा है. भले ही यह युद्ध ईरानी शासन को पूरी तरह न गिरा पाए, लेकिन ईरान के 'प्रतिरोध के अक्ष' का कमजोर होना, हिजबुल्ला पर भारी हमले और सीरिया में असद शासन का पतन नेतन्याहू को इस क्षेत्र का 'अविवादित अधिपति' बनाने की ओर अग्रसर कर रहे हैं.
युद्ध का दूसरा सबसे बड़ा लाभ नेतन्याहू के निजी कानूनी संकटों में दिख रहा है. 2019 से चल रहे भ्रष्टाचार के तीन मामलों ने उन्हें जेल की दहलीज तक पहुंचा दिया था. लेकिन गाजा और अब ईरान युद्ध ने इन अदालती कार्यवाहियों को बार-बार बाधित किया है.
नेतन्याहू ने खुले तौर पर राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग से माफी की मांग की है, ताकि वे 'पूरी तरह से बंधनमुक्त' होकर युद्ध और क्षेत्रीय कूटनीति पर ध्यान केंद्रित कर सकें. 12 मार्च को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने अदालती कार्यवाही को 'हास्यास्पद सर्कस' करार दिया. हालांकि न्याय मंत्रालय ने अभी माफी देने से इनकार किया है, लेकिन युद्ध की आपात स्थिति नेतन्याहू को जनता की सहानुभूति बटोरने और न्यायपालिका पर दबाव बनाने का अवसर दे रही है.
इतना ही नहीं, इस युद्ध की आड़ में नेतन्याहू की सरकार उन न्यायिक सुधारों को भी आगे बढ़ा रही है, जिन्हें पहले बड़े जन-विरोध का सामना करना पड़ा था. विपक्षी नेता यायर लैपिड ने आरोप लगाया है कि जब पूरा देश युद्ध लड़ रहा है, तब गठबंधन सरकार अटॉर्नी जनरल की शक्तियों को कम करने और मीडिया पर नियंत्रण बढ़ाने वाले कानून चुपके से पारित करने की कोशिश कर रही है.
युद्ध ने उन विरोध प्रदर्शनों को ठंडा कर दिया है जो 2022 के अंत में नेतन्याहू की जीत के बाद शुरू हुए थे.
फिलीस्तीनी मुद्दे पर भी अंतरराष्ट्रीय दबाव अब गौण हो गया है. जब दुनिया की नजरें तेहरान और वाशिंगटन पर टिकी हैं, तब वेस्ट बैंक और गाजा में इजरायली कार्रवाई तेज हो गई है. वेस्ट बैंक में युद्ध शुरू होने के बाद से ही 11 फिलीस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें तम्मून गांव का बनी ओदेह परिवार भी शामिल है.
गाजा में मानवीय सहायता की स्थिति और भी बदतर हो गई है, लेकिन ईरान के साथ बड़े युद्ध ने इन मुद्दों को वैश्विक सुर्खियों से बाहर धकेल दिया है.
अंततः, यह सब चुनाव के गणित पर आकर टिकता है. युद्ध से पहले नेतन्याहू और नफ्ताली बेनेट के बीच कड़ी टक्कर थी, लेकिन हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, युद्ध के संचालन को लेकर नेतन्याहू पर जनता का भरोसा 60% से बढ़कर 62% हो गया है.
एक 'मजबूत युद्धकालीन नेता' की छवि ने उन्हें फिर से बढ़त दिला दी है. विश्लेषकों का मानना है कि इस लोकप्रियता का लाभ उठाने के लिए नेतन्याहू साल के मध्य में समय पूर्व चुनाव की घोषणा कर सकते हैं, जिससे वे न केवल सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करेंगे, बल्कि अपने कानूनी संकटों से भी हमेशा के लिए पार पा लेंगे.
ईरान युद्ध इजरायल के नेतन्याहू के लिए हल कर सकता है ये 5 बड़ी समस्याएं:
1) ईरानी खतरे का खात्मा और क्षेत्रीय वर्चस्व: नेतन्याहू ने दशकों बाद अमेरिका को ईरान के खिलाफ सीधे सैन्य संघर्ष में शामिल करने में सफलता पाई है. इससे न केवल ईरान कमजोर हुआ है, बल्कि हिजबुल्ला और सीरिया जैसे उसके सहयोगियों के पतन ने इजरायल को मध्य पूर्व की एकमात्र महाशक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है.
2) भ्रष्टाचार के मुकदमों से बचाव: युद्ध की स्थिति का उपयोग नेतन्याहू अदालती कार्यवाहियों को टालने के लिए कर रहे हैं. वे राष्ट्रपति से माफी की मांग कर रहे हैं ताकि भ्रष्टाचार के आरोपों में संभावित 10 साल की जेल की सजा से बच सकें और खुद को बंधनमुक्त नेता के रूप में पेश कर सकें.
3) न्यायिक सुधारों को लागू करना: युद्ध के कारण उपजे राष्ट्रवादी माहौल का फायदा उठाकर नेतन्याहू की सरकार उन विवादित कानूनों को पारित करा रही है, जो न्यायपालिका की शक्ति को कमजोर करते हैं. युद्ध ने उन बड़े नागरिक विरोध प्रदर्शनों को शांत कर दिया है जो उनके इन सुधारों के खिलाफ हो रहे थे.
4) अंतरराष्ट्रीय आलोचना से मुक्ति: ईरान के साथ बड़े पैमाने पर युद्ध होने के कारण वैश्विक समुदाय का ध्यान फिलीस्तीनी क्षेत्रों (गाजा और वेस्ट बैंक) से हट गया है. इससे इजरायल को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों या कड़े कूटनीतिक दबाव के बिना अपनी नीतियों को लागू करने की खुली छूट मिल गई है.
5) चुनावों में जीत की संभावना: युद्ध से पहले नेतन्याहू की लोकप्रियता गिर रही थी, लेकिन एक 'सफल' युद्धकालीन प्रधानमंत्री के रूप में उनकी रेटिंग में सुधार हुआ है. अमेरिकी समर्थन हासिल करने का श्रेय लेकर वे समय पूर्व चुनाव जीत सकते हैं और अपनी सत्ता को सुरक्षित कर सकते हैं.