‘प्याज-लहसुन न खाने’ को क्रूरता मानते हुए HC ने तलाक बरकरार रखा
नई दिल्ली । डेस्क: गुजरात हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उस निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पत्नी द्वारा प्याज और लहसुन न खाने की जिद और उसके 'कट्टर व्यवहार' को क्रूरता मानते हुए तलाक की डिक्री मंजूर की गई थी. कोर्ट ने माना कि पत्नी की इस अडिग जीवनशैली और खान-पान की पाबंदियों के कारण वैवाहिक जीवन में कभी न खत्म होने वाले मतभेद पैदा हो गए थे.
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पति और उसके परिवार ने पत्नी के लिए अलग भोजन की व्यवस्था की थी, लेकिन पत्नी के अड़ियल रुख और लगातार होने वाले विवादों ने मानसिक प्रताड़ना का रूप ले लिया था.
27 नवंबर 2025 को आए इस फैसले में न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक अदालत द्वारा साक्ष्यों का सही मूल्यांकन किया गया है और इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.
अपील के दौरान पत्नी ने तलाक को तो स्वीकार कर लिया था, लेकिन उसने गुजारा भत्ते की राशि बढ़ाने की मांग की थी. पत्नी का दावा था कि उसका पति एक फैक्ट्री का मालिक है और महीने के 60 से 70 हजार रुपये कमाता है, जबकि पति ने वेतन प्रमाण पत्र पेश कर खुद की आय बहुत कम बताई और कहा कि उस पर बुजुर्ग माता-पिता और उच्च शिक्षा ले रहे बेटे की जिम्मेदारी है.
हाई कोर्ट ने पति की वित्तीय स्थिति और उसके रहने के आवास (एक कमरा और रसोई) को ध्यान में रखते हुए पत्नी की उच्च रखरखाव राशि की मांग को खारिज कर दिया. अदालत ने आदेश दिया कि पति जुलाई 2020 से पत्नी को 10,000 रुपये प्रति माह का स्थायी गुजारा भत्ता देना जारी रखे और बकाया राशि को जल्द से जल्द जमा कराए.