सरकार का हस्तक्षेप, ननों को जल्द मिल सकती है जमानत
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों को जल्द ही राहत मिलने की संभावना है. गुरुवार को केरल के सांसदों के साथ बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह आश्वासन दिया.
बैठक में शामिल सांसदों के अनुसार, शाह ने कहा कि सरकार इस सप्ताह ननों की जमानत के लिये तत्काल कदम उठायेगी. एक सांसद ने कहा कि शाह ने निर्देश दिए हैं कि दो कैथोलिक ननों की जमानत के लिये ट्रायल कोर्ट में फिर से आवेदन किया जाये.
शाह ने यह भी आश्वासन दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार जमानत आवेदन का विरोध नहीं करेगी.
साथ ही, छत्तीसगढ़ सरकार और ननों की कानूनी टीम ट्रायल कोर्ट के जमानत अस्वीकार करने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर करेगी.
दुर्ग के सत्र न्यायालय ने बुधवार को ननों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि उन्हें बिलासपुर की राष्ट्रीय जांच एजेंसी कोर्ट में आवेदन करना चाहिये. कोर्ट ने माना कि मानव तस्करी के आरोप एनआईए अधिनियम के तहत आते हैं, इसलिए उसके पास अधिकार क्षेत्र नहीं है.
गृह मंत्री के हवाले से, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सांसद हारिस बीरन ने कहा कि इस मामले को सुनने के लिये एनआईए कोर्ट के पास कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.
उन्होंने कहा, “यदि यूएपीए के तहत कोई अपराध दर्ज करना हो, तो संबंधित राज्य सरकार को एनआईए निदेशक को आवेदन देना होगा, जो बदले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से यूएपीए अपराध के लिए मंजूरी लेगा. इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ है. इसलिये, एनआईए कोर्ट के पास इस मामले को सुनने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है.”
ननों, प्रीता मैरी और वंदना फ्रांसिस, को 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर स्थानीय बजरंग दल सदस्य रवि निगम की शिकायत के बाद गिरफ्तार किया गया था.
गिरफ्तारी ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, क्योंकि केरल के सांसदों ने संसद में इस मुद्दे को उठाया और केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप कर ननों को रिहा करने की मांग की.