रिलायंस-बीपी से सरकार ने मांगा 30 अरब डॉलर का मुआवजा
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसकी भागीदार बीपी (BP) से 30 अरब डॉलर (लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के मुआवजे की मांग की है. सरकार का आरोप है कि इन कंपनियों ने कृष्णा गोदावरी बेसिन (KG-D6) फील्ड में जरूरत से ज्यादा बड़े बुनियादी ढांचे का निर्माण किया और बाद में प्राकृतिक गैस के उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहीं.
यह दावा एक तीन सदस्यीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Arbitration Tribunal) के समक्ष किया गया है, जिसने 14 साल से चले आ रहे इस विवाद पर अपनी सुनवाई हाल ही में पूरी की है.
विवाद की मुख्य जड़ धीरूभाई-1 और 3 (D1-D3) गैस क्षेत्रों से जुड़ा निवेश और उत्पादन है. सरकार का तर्क है कि रिलायंस ने स्वीकृत निवेश योजना का पालन नहीं किया, जिससे क्षमताओं का कम उपयोग हुआ.
सरकार के अनुसार, कंपनियों ने 31 कुओं के बजाय केवल 18 कुओं से ही गैस निकाली, जिससे जलाशय को नुकसान पहुंचा और गैस का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया.
वहीं, रिलायंस और बीपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि तेल और गैस की खोज एक उच्च जोखिम वाला क्षेत्र है. कंपनियों का कहना है कि तकनीकी और भूगर्भीय चुनौतियों जैसे पानी के रिसाव और दबाव में कमी के कारण उत्पादन कम हुआ, न कि किसी कुप्रबंधन की वजह से.
मामले की सुनवाई के दौरान कंपनियों ने स्पष्ट किया कि उत्पादन साझाकरण अनुबंध (PSC) के तहत उन्हें लाभ साझा करने से पहले अपनी पूरी विकास लागत वसूलने का अधिकार है. उन्होंने सरकार द्वारा लागत वसूली को रोकने के कदम को अनुबंध के खिलाफ बताया है.
गौरतलब है कि KG-D6 ब्लॉक से गैस का उत्पादन वर्ष 2010 से ही अनुमान से कम रहने लगा था और फरवरी 2020 में यहां से उत्पादन पूरी तरह बंद हो गया.
अब इस बड़े विवाद पर न्यायाधिकरण का फैसला अगले साल आने की उम्मीद है, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाने की संभावना जताई जा रही है.