ट्रंप के लिये हर मर्ज की एक दवा-टैरिफ
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीतिक तरकश में 'टैरिफ' एक ऐसा तीर बन गया है, जिसे वे हर मोर्चे पर चलाने के लिए तैयार हैं. व्यापार युद्ध से शुरू हुआ यह सिलसिला अब भू-राजनीतिक सौदेबाजी तक जा पहुँचा है.
ताजा मामला ग्रीनलैंड का है, जिसे "हासिल" करने की अपनी जिद पूरी करने के लिए ट्रंप ने अब उन देशों को टैरिफ की धमकी दी है जो उनके इस प्लान का समर्थन नहीं करेंगे.
व्हाइट हाउस के एक कार्यक्रम में ट्रंप ने साफ कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ग्रीनलैंड पर कब्जा उनकी प्राथमिकता है और जो देश इसमें बाधक बनेंगे, उन्हें अमेरिकी बाजार में भारी कीमत चुकानी होगी.
2025 में सत्ता में लौटने के बाद से ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को केवल आर्थिक नीति नहीं, बल्कि एक बहुउद्देशीय 'हथियार' बना दिया है. चाहे वह फेंटेनल ड्रग्स की तस्करी रोकना हो, ईरान पर शिकंजा कसना हो, या मैक्सिको के साथ जल अधिकारों का विवाद सुलझाना. ट्रंप हर समस्या का समाधान आयात शुल्कों में ही देख रहे हैं.
ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क और वहां की स्थानीय सरकार के साथ जारी "मौलिक मतभेदों" के बीच टैरिफ की यह नई धमकी दिखाती है कि ट्रंप अब कूटनीति की मेज पर बातों से ज्यादा 'टैक्स' के डंडे पर भरोसा कर रहे हैं.