FATF की रिपोर्ट में पाकिस्तान पर निशाना
नई दिल्ली । डेस्क: FATF की रिपोर्ट में पाकिस्तान पर आतंकी वित्तपोषण के लिये निशाना साधा गया है. वैश्विक मनी लांड्रिंग और आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखने वाली संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में राज्य प्रायोजित आतंकवाद की अवधारणा को रेखांकित कर वैश्विक आतंकवाद विरोधी चर्चा में एक नया मोड़ ला दिया है.
इस रिपोर्ट में भारत के उस दावे को बल मिला है, जिसमें उसने लंबे समय से कहा है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है.
FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स), जो धन शोधन और आतंकी वित्तपोषण को रोकने के लिये अंतरराष्ट्रीय मानक तय करता है, ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि कुछ आतंकी संगठनों को राष्ट्रीय सरकारों से वित्तीय और अन्य प्रकार की सहायता मिलती है.
भारत ने वर्षों से इस मुद्दे को उठाया है, और अब FATF की यह रिपोर्ट भारत के रुख की पुष्टि करती है. भारत की राष्ट्रीय जोखिम आकलन 2022 रिपोर्ट में पहले ही पाकिस्तान से होने वाले राज्य प्रायोजित आतंकवाद को आतंकी वित्तपोषण के प्रमुख जोखिम के रूप में चिह्नित किया गया था.
FATF की रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM), के वित्तपोषण के तौर-तरीकों पर भी प्रकाश डाला गया है.
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि आतंकी संगठन अपनी गतिविधियों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान सेवाओं का दुरुपयोग कर रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, 2019 के पुलवामा हमले में विस्फोटक उपकरण का एक प्रमुख हिस्सा अमेजन के माध्यम से खरीदा गया था.
इसी तरह, 2022 के गोरखनाथ मंदिर हमले में एक व्यक्ति ने इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवांत (ISIL) को समर्थन देने के लिए पेपैल के जरिए धन हस्तांतरित किया था.
FATF की इस रिपोर्ट के वैश्विक आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर गहरे प्रभाव पड़ने की संभावना है.