क्या छत्तीसगढ़ में भी बिक रही है नकली लेविपिल?
रायपुर । संवाददाता : नकली लेविपिल 500 की तेलंगाना तथा गुजरात में जब्ती से सवाल उठने लगे है कि कहीं छत्तीसगढ़ में भी यह दवा तो बिक नहीं रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिये ड्रग इन्सपेक्टरों को इन बैच नंबर वाले दवाओं की जांच करना चाहिये. ताकि मरीजों को नुकसान न उठाना पड़े.
गौरतलब है कि यह दवा मिर्गी केै मरीजों को दी जाती है.
नकली लेविपिल 500 (लेवेटिरासेटम 500 मिलीग्राम) टैबलेट की भारी मात्रा में तेलंगाना में जब्ती ने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को उजागर किया है. ये नकली दवाइयाँ सन फार्मा के असली उत्पाद के रूप में बाजार में बिक रही थीं.
कोलकाता के दवा विशेषज्ञ डॉ. अविचल चौधरी ने सरकार से ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) को निर्देश देने की मांग की है कि सन फार्मा को लेविपिल की सभी बैच वापस मंगाने का आदेश दिया जाये. उनके अनुसार, तेलंगाना और गुजरात में नकली दवाओं की जब्ती से पता चलता है कि भारत का क्यूआर कोड कार्यक्रम कमजोर है और यह मरीजों व निरीक्षकों को गुमराह करता है.
तेलंगाना के डीसीए अधिकारियों ने हैदराबाद और करीमनगर में छापेमारी के दौरान बैच नंबर GTF1540A की नकली लेविपिल 500 मिलीग्राम टैबलेट जब्त किये. ये बैच नंबर गुजरात में पहले भी नकली पाये ये थे.
डॉ. चौधरी ने चेतावनी दी कि इन नकली दवाओं में सक्रिय क्यूआर कोड हैं, जो स्कैन करने पर उन्हें असली के रूप में प्रमाणित करते हैं, जिससे मरीजों को भ्रम होता है. इन दवाओं की समाप्ति तिथि अप्रैल-मई 2026 तक है, जिससे ये लंबे समय तक खतरा बनी रह सकती हैं.
डॉ. चौधरी ने दो महीने पहले सन फार्मा से स्वेच्छा से लेविपिल को बाजार से वापस मंगाने का आग्रह किया था, लेकिन कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि क्यूआर कोड डेटा सन फार्मा या इसके सॉल्यूशन प्रदाता फार्मासिक्योर इंक. के स्तर पर चोरी हुआ हो सकता है. दोनों ने इस डेटा चोरी पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है.
डॉ. चौधरी ने कहा कि इन क्यूआर कोड की कार्यक्षमता एक गंभीर चिंता है, क्योंकि यह उत्पाद की प्रामाणिकता की जाँच करने वालों को गुमराह करती है. नकली दवाओं का पता केवल तब चलता है जब वे चिकित्सीय प्रभाव नहीं देतीं या बाजार में संयोगवश पकड़ी जाती हैं, जो मरीजों के लिये गंभीर जोखिम पैदा करता है.