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एल नीनो और युद्ध: चीन की खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा पर दोहरी मार

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03 मई 2026, 06:33 PM 3 मिनट में पढ़ें 4

खेत-चीन
खेत-चीन

बीजिंग । डेस्क: चीन वर्तमान में एक दोहरे संकट का सामना कर रहा है, जहां एक ओर प्रकृति की मार यानी 'एल नीनो' का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी ओर ईरान पर अमेरिकी-इजरायल युद्ध के वैश्विक प्रभाव उसकी अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकते हैं. विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष के अंत तक आने वाला तीव्र एल नीनो चीन की कृषि सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है. 


चीन की पारंपरिक लघु-स्तरीय कृषि प्रणाली में अत्यधिक मौसम के झटकों से निपटने की पर्याप्त क्षमता नहीं है, जिसके कारण चावल, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों पर भारी संकट आने की आशंका है.

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एल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है जिसमें प्रशांत महासागर के पानी का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे दुनिया भर के मौसम चक्र में बदलाव आता है. चीन में इसके कारण दक्षिण में भारी बाढ़ और उत्तर में सूखे जैसी स्थितियां पैदा होती हैं. राष्ट्रीय जलवायु केंद्र के अनुसार, एक मध्यम से तीव्र एल नीनो विकसित हो रहा है जो साल के अंत तक जारी रहेगा. 


हुइशांग फ्यूचर्स के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जैसे देशों की तुलना में चीन की खेती काफी बिखरी हुई है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के प्रति इसकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. विशेष रूप से गेहूं की पैदावार प्रभावित होने की संभावना है, हालांकि सरकारी नीतियों के कारण कीमतों में फिलहाल स्थिरता देखी जा रही है.


कृषि के साथ-साथ चीन की ऊर्जा सुरक्षा भी दांव पर है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट ने तेल और गैस की कीमतों में आग लगा दी है, जिससे उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है. इस बीच, भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग बढ़ने का अनुमान है, जिससे चीन को कोयले पर अपनी निर्भरता और बढ़ानी पड़ सकती है. 


सिटिक सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी बढ़ने से थर्मल पावर उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे लाखों टन अतिरिक्त कोयले की खपत होगी. यह स्थिति चीन के कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों के लिए भी एक बड़ी बाधा बन सकती है.


सिर्फ अनाज और बिजली ही नहीं, बल्कि 'कॉपर' यानी तांबे की आपूर्ति पर भी एल नीनो की छाया पड़ रही है. दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख खनन क्षेत्रों में खराब मौसम के कारण तांबे का उत्पादन प्रभावित हो सकता है. चीन अपने पावर ग्रिड और निर्माण क्षेत्र के लिए तांबे पर बहुत अधिक निर्भर है, और घरेलू संसाधनों की कमी के कारण उसे वैश्विक बाजार में भारी कीमतों का सामना करना पड़ सकता है. 


हालांकि मौसम विभाग ने 'सुपर एल नीनो' की अफवाहों को खारिज करते हुए इसे मध्यम स्तर का बताया है, लेकिन युद्ध और जलवायु परिवर्तन के इस मेल ने बीजिंग के नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है. आने वाले महीने यह तय करेंगे कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इस बहुआयामी दबाव को कैसे झेलती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP