सोम, 19 अक्टू. 2026

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कोरोना से छत्तीसगढ़ में आठ गुना अधिक मौतेंः फिर से आहट

छत्तीसगढ़ में कोरोना से मरने वालों का सरकार ने आंकड़ा छुपाया था

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29 मई 2025, 12:47 PM 7 मिनट में पढ़ें 4

छत्तीसगढ़ में आठ गुना अधिक मौतें
छत्तीसगढ़ में आठ गुना अधिक मौतें

रायपुर | ममता मानकरः छत्तीसगढ़ में सरकार ने कोरोना से होने वाली लगभग हर 10 में से 9 मौतों के आंकड़ों को छुपा दिया. आश्चर्य की बात है कि आंकड़ों की बाजीगरी का खेल सिर्फ छत्तीसगढ़ में नहीं खेला गया बल्कि पूरे देश में जनता को गुमराह करने का काम किया गया. 


देश में 2021 में कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़ों पर केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक, सभी ने लगातार झूठ बोला. जनता को फर्जी आंकड़े बताए गये और मौतों पर सरकारें राजनीति करती रहीं.

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लेकिन, अब जबकि इन मौतों के असली आंकड़े आ चुके हैं. इस मामले पर सरकारें मौन बनी हुई हैं.


छत्तीसगढ़ में सरकार ने कोरोना से होने वाली मौतों के बारे में कहा कि राज्य में 2021 में 10,229 मौते हुईं लेकिन अब जा कर यह आंकड़ा आया है कि राज्य में 2021 में कोरोना से मरने वालों की संख्या आठ गुना अधिक थी और वास्तविक आंकड़े के मुताबिक 81,106 मौतें हुई थीं.


गुजरात में जो आंकड़े बताए गए थे, वहां तो 33 गुना अधिक मौतें हुई थीं.


सरकारी आंकड़ों का झूठा खेल

अगर आपको यकीन है कि देश में आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते, तो ये रिपोर्ट शायद आपका भरोसा हिला सकती है. 2021 में देश भर में कोविड-19 से कितनी मौतें हुईं इसका जवाब केंद्र सरकार से अलग और हाल में जारी की गई नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) से बिल्कुल अलग है.


फर्क इतना कि सरकारी आंखों को जितनी मौतें दिखीं, वही मौतें सीआरएस की नजर में कई गुना अधिक जा पहुंचीं.


देश के जो आंकड़े सरकार ने बताए, उससे पांच गुना अधिक लोग कोरोना में मारे गए थे और छत्तीसगढ़ में तो यह आंकड़ा आठ गुना था.


छत्तीसगढ़ सरकार ने 2021 में कोरोना से 10,229 मौतें दर्ज कीं. लेकिन सीएसआर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह संख्या हकीकत से काफी कम करीब आठ गुना तक की है.


ये कहानी सिर्फ छत्तीसगढ़ की नहीं है, देशभर में यही हाल है.


देश में सरकारी आंकड़े 3.3 की तुलना में 19.7 लाख मौतें 

सीएसआर के आंकड़े बताते हैं कि 2021 में भारत में 19.7 लाख ‘अतिरिक्त मौतें’ हुईं, जो कि उस साल की आधिकारिक कोविड मौतों 3.3 लाख का लगभग छह गुना है. 


कोरोना महामारी के दौरान छतीसगढ़ में आधिकारिक आंकड़ो के अनुसार 10,229 मौतें हुई. जबकि हाल ही आयी नागरिक पंजीकरण प्रणाली सीआरएस 2021 की रिपोर्ट से पता चलता चलता है कि 2021 में आधिकारिक आंकड़ो से 8 गुना अधिक यानी 81,106 मौते हुई थीं.


ठीक ऐसा ही हाल पूरे देश में रहा है. सीएस आर के मुताबिक भारत में 2021 में 19.7 लाख अतिरिक्त मौतें हुई यानी आधिकारिक कोविड मौतों के आंकड़ो का 6 गुना अधिक

सबसे कम आंकड़े गुजरात के बताये गयेआंकड़ों से पता चला कि मौतों की सबसे कम गिनती गुजरात में हुई, जहाँ लगभग 2 लाख अतिरिक्त मौतें हुईं, जो 2021 में राज्य की आधिकारिक गिनती 5,800 से 33 गुना अधिक है.


मध्य प्रदेश में कोविड से होने वाली मौतों की संख्या आधिकारिक संख्या से 18 गुना ज़्यादा और पश्चिम बंगाल में 15 गुना ज़्यादा थी.


बिहार, राजस्थान, झारखंड और आंध्र प्रदेश में भी कोविड से होने वाली मौतों की संख्या आधिकारिक संख्या से 10 गुना ज़्यादा थी.


सीजी खबर की पड़ताल से कम निकले सरकारी आंकड़े

बात करें छतीसगढ़ की तो राज्य में कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े किस तरह लगातार छुपाए गए, उसके लिए सेंट्रल गोंडवाना ख़बर ने हर महीने होने वाली मौतों के एक-एक आंकड़े की पड़ताल पहले भी लगातार करती रही है. 


उदाहरण के लिए 1 मई 2021 को राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में 2447 लोगों की मौत कोरोना से स्वीकार की. 15 दिन में ये आंकड़ा 2963 पर पहुंच गया यानी 1 मई से 15 मई के बीच 516 लोगों की मौत हुई.


लेकिन सेंट्रल गोंडवाना ख़बर ने कोरोना से होने वाली मौतों के, अलग-अलग अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज़ों से ही जो जानकारी एकत्र की, उसके अनुसार 15 मई तक रायपुर में कम से कम 3304 लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी थी और कोरोना प्रोटोकाल के ही तहत उनका अंतिम संस्कार भी किया गया.


यानी स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, उनमें और सेंट्रल गोंडवाना खबर के पास कोरोना से होने वाली मौत के नाम-पते समेत तमाम विस्तृत जानकारी उपलब्ध है, उनमें 341 मौतों का अंतर है.


कई मौतें तो दर्ज भी नहीं हुईं

इन मौतों के अलावा भी कई मौतें ऐसी हुई, जिन्हें किसी दस्तावेज़ में कोरोना से मौत के तौर पर दर्ज ही नहीं किया गया. उदाहरण के लिए रायपुर के देवेंद्र नगर शमशानघाट में 1 से 15 मई के बीच 47 कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार किया गया.


लेकिन इनमें से 5 का नाम स्वास्थ्य विभाग की सूची में नहीं है. जोरा शमशान घाट में जिन दो लोगों का इस दौरान अंतिम संस्कार किया गया, उनका नाम भी स्वास्थ्य विभाग की सूची में नहीं है. 


फुंडहर शमशान घाट में 8 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, इनमें से दो का उल्लेख स्वास्थ्य विभाग की सूची में नहीं है.


सड्डू शमशान गृह में जिन 20 लोगों का अंतिम संस्कार किया गया, उसमें से 5 लोगों के नाम स्वास्थ्य विभाग की सूची में नहीं हैं.


इसी तरह मारवाड़ी शमशान घाट में 1 से 3 मई तक 17 कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार किया गया. इनमें 4 लोगों के नाम स्वास्थ्य विभाग की सूची में नहीं हैं.


सर्वाधिक मौतें 2020 और 2021 में

2024 के दिसंबर में सेंट्रल गोंडवाना खबर ने एक और चौंकाने वाला तथ्य उजागर किया कि भारत सरकार से कोरोना से होने वाली मौत के आंकड़े जब पूछे गए तो सरकार ने संसद में केवल 2022 से 2024 तक के कोविड मृत्यु के आंकड़े प्रस्तुत किए.


जबकि देश में सर्वाधिक मौतें 2020 और 21 में हुई थीं. 


राज्यसभा के आर्काइव से मिले जवाब के अनुसार, 2020 में 1,48,738 और 2021 में 3,32,342 लोगों की मौत हुई थी यानि कुल 4,81,080 मौतें.


लेकिन सरकार इन आंकड़ों को संसद में रखने से परहेज़ करती रही. नतीजा? जब आप 2020 से 2024 तक के कुल सरकारी आंकड़े जोड़ते हैं, तो संख्या 5,33,658 होती है.


लेकिन जो रिपोर्ट संसद में पेश होती है, उसमें से 4.8 लाख मौतें गायब रहती हैं.


इस तरह से आंकड़ा निकलकर सामने आया

अब बात करें सीएसआर 2021 की रिपोर्ट की तो इसके मुताबिक मृत्यु दर अपरिवर्तित रहने पर भी, जनसंख्या बढ़ने के साथ ही मौतों की संख्या में भी वृद्धि होगी.


इसलिए, नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) में बताई गई 2019 की मृत्यु दरों को जनगणना कार्यालय द्वारा अनुमानित 2021 की जनसंख्या पर लागू किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामान्य तौर पर 2021 में मौतों की संख्या क्या होनी चाहिए थी. 


असल में, 2019 तक मृत्यु दर में लगातार गिरावट आ रही थी, इसलिए ये अनुमान वास्तव में कुछ हद तक उन संख्याओं का अनुमान लगाते हैं, जो होनी चाहिए थीं.


इस अनुमान की तुलना, सीआरएस द्वारा बताई गई 2021 की वास्तविक संख्या से की गई, जिससे 'अतिरिक्त मौतों' का अंतर सामने आया.


इनमें मध्य प्रदेश में 2021 के लिए सरकार की कोविड मृत्यु संख्या लगभग 6,900 थी. हालाँकि, 2021 में दर्ज कुल मौतें 2019 की मृत्यु दर का उपयोग करके अनुमानित संख्या से लगभग 1.3 लाख अधिक थीं.


पश्चिम बंगाल ने 2021 में 10,000 से अधिक कोविड मौतों की सूचना दी, जबकि अतिरिक्त मौतें 1.5 लाख से अधिक थीं.


बड़े राज्यों में केरल, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र और दिल्ली ने 2021 के लिए संबंधित सरकारों द्वारा दी गई कोविड मृत्यु संख्या और उस वर्ष के लिए गणना की गई अतिरिक्त मौतों के बीच सबसे कम विसंगति दिखाई.


इनमें अतिरिक्त मौतें आधिकारिक कोविड मौतों से 1.5 से 3.1 गुना तक अलग थीं.


कोविड महामारी सिर्फ एक महामारी नहीं बल्कि आंकड़ों की, हमारी संवेदनशीलता की, एक लोक कल्याणकारी राज्य की भूमिका की और सरकारों की पारदर्शिता की भी परीक्षा थी.


जब सरकारी और स्वतंत्र स्रोतों के आंकड़े इतने बड़े स्तर पर मेल नहीं खाते, तो सवाल उठना लाज़मी है: क्या हमने सिर्फ एक महामारी झेली या एक ‘सिस्टम पेंडेमिक’ भी?


अब पुनः कोरोना की दस्तक ने एक बार फिर पुरानी डरावनी यादें ताजा कर दीं हैं, लेकिन उम्मीद है कि हमारी सरकारों ने सबक लिया होगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP