US-Iran जंग रोकने की कवायद तेज, पाक ने फिर संभाला कमान
इस्लामाबाद । डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध को रोकने तथा कूटनीतिक रास्ते बहाल करने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं. पाकिस्तान सरकार ने ईरान के शीर्ष अधिकारियों को बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशहाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बात कर उन्हें जल्द से जल्द पाकिस्तान आने का न्योता दिया.
इसके साथ ही, पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज सादिक ने भी ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद कब पहुंचेगा.
पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के नेतृत्व पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर चेतावनी दी है. ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर ईरान पर वार्ता को लेकर "दोगुला रवैया" अपनाने का आरोप लगाया और संवाददाताओं से बातचीत में साफ कहा कि यह ईरान के पास एक "अच्छा समझौता" करने का आखिरी मौका है, अन्यथा उसे "पूर्ण आत्मसमर्पण" या "विनाश" का सामना करना पड़ेगा.
अमेरिका और इज़राइल द्वारा इस वर्ष शुरू किए गए इस सैन्य संघर्ष के बाद से ही क्षेत्र में तनाव चरम पर है. वहीं, दूसरी ओर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने ट्रम्प के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका के साथ सीधे तौर पर कोई बातचीत नहीं चल रही है, केवल ओमान के साथ रणनीतिक जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को खोलने पर तकनीकी चर्चा हो रही है.
बाघेई ने स्पष्ट किया कि इस संकट में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका में है और कतर आवश्यकता पड़ने पर सहायता दे रहा है.
फरवरी में युद्ध की शुरुआत से ही पाकिस्तान संयम, शांति और बातचीत की वकालत करता रहा है. अप्रैल में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक पहली सीधी बातचीत हुई थी, जिसके बाद जून में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे.
हालांकि, दो महीनों के भीतर युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन हुआ, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी और दोनों पक्षों के बीच हमले तेज हो गए. इसके बावजूद, पाकिस्तान और ईरान दोनों ही इस समझौते को शांति बहाली का मुख्य आधार मान रहे हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान और कतर राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर शांति का प्रयास कर रहे हैं, जबकि ओमान समुद्र में सुरक्षा व्यवस्था को सामान्य करने में लगा है.
हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका की स्पष्ट रणनीति का अभाव और राष्ट्रपति ट्रम्प के बदलते बयान इस संघर्ष को हल करने में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं. पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों पक्षों को अपनी प्रतिबद्धताओं पर टिकाए रखने की है.