ED कोई 'आत्मघाती ड्रोन' या 'सुपर पुलिस' नहीं- मद्रास हाईकोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाये हैं. एक मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने टिप्पणी की कि ईडी कोई 'ड्रोन या आत्मघाती हथियार' नहीं है जो अपनी मर्जी से हमला कर सके, न ही यह 'सुपर पुलिस' है जिसे हर मामले में जांच करने का अधिकार हो.
आरकेएम पावरजेन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में सबसे पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी. 2015 से ईडी भी इस मामले में अलग से जांच कर रही थी. हालांकि, 2017 में सीबीआई ने अपनी जांच बंद कर दी थी, लेकिन ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जांच जारी रखी और 31 जनवरी को कंपनी के 901 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज कर दिया.
इस कदम को चुनौती देते हुए कंपनी ने मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया.
न्यायमूर्ति एमएस रमेश और न्यायमूर्ति वी लक्ष्मीनारायण की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ईडी केवल पीएमएलए के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर सकती है, बशर्ते कोई निर्धारित अपराध हो या अपराध होने की संभावना हो.
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि पहले से किसी अपराध का संकेत नहीं मिलता, तो पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू करना अनुचित है.
कंपनी की ओर से वकील बी कुमार ने तर्क दिया कि ईडी ने अदालत के पिछले फैसले की अवहेलना करते हुए सावधि जमा को फ्रीज किया, और उनके पास इस मामले में कोई नया सबूत नहीं है.
सुनवाई के बाद, अदालत ने ईडी के इस कदम (फिक्स्ड डिपॉजिट को फ्रीज करने) को रद्द करने का आदेश दिया है.