नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से शांति के बारे में सोचने को बाध्य नहीं– ट्रंप
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान सामने आया है. अबकी उन्होंने तंज किया है कि नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर वे शांति के लिये सोचने को बाध्य नहीं है. इससे सवाल खड़ा होता है कि यदि ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिल जाता तो क्या वे वेनेजुएला पर रात के समय हमला करके वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगुवा न करवाते? क्या वे ईरान को सैन्य कार्यवाहियों की घमकी नहीं देते? क्या नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर वे ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की मंशा का परित्याग कर देते?
इसका जवाब, राजनीति की सामान्य सी भी जानकारी रखने वाला आम शख्स दे सकता है कि जी, नहीं, शांति पुरस्कार मिलने से ट्रंप के आक्रमक रवैये में कोई फर्क नहीं पड़ता. वह, बदस्तूर जारी रहता.
गौरतलब है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने को लेकर अपनी नाराजगी एक बार फिर खुलकर जाहिर की है.
इस नाराजगी का ताजा रूप नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोरे को भेजे गए एक संदेश में सामने आया है, जिसमें ट्रंप ने कहा है कि अब वह खुद को “केवल शांति के बारे में सोचने” के लिए बाध्य नहीं मानते.
सोमवार को सामने आए इस संदेश में ट्रंप ने लिखा, “यह देखते हुए कि आपके देश ने आठ युद्धों को रोकने के बावजूद मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, अब मैं शांति के बारे में ही सोचने को बाध्य नहीं हूं.”
इस संदेश की प्रामाणिकता की पुष्टि एएफपी समाचार एजेंसी को मामले से जुड़े एक सूत्र ने की, जबकि नॉर्वे के अखबार वीजी से बात करते हुए प्रधानमंत्री स्टोरे ने भी इसकी पुष्टि की.
ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए हैं, विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों के बीच विवाद का विषय बना हुआ है.
इनमें से कुछ टकराव अल्पकालिक रहे, जैसे भारत और पाकिस्तान से जुड़ा तनाव, जबकि कुछ संघर्ष आज भी जारी हैं. इनमें गाजा में इज़राइल का युद्ध और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में चल रहा संघर्ष शामिल है.
यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ने यह संदेश नॉर्वे की सरकार को क्यों भेजा, क्योंकि नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे की राजनीतिक नेतृत्व द्वारा नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र नॉर्वेजियन नोबेल समिति द्वारा दिया जाता है. अपने लिखित जवाब में प्रधानमंत्री स्टोरे ने इसी बात को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को यह स्पष्ट कर दिया है कि पुरस्कार एक स्वतंत्र समिति द्वारा तय किया जाता है.
नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रंप की नाराजगी नई नहीं है. हाल ही में यह मुद्दा तब फिर चर्चा में आया, जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो ने व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक सौंपा.
यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब इससे कुछ ही सप्ताह पहले अमेरिकी विशेष बलों द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण की खबरें सामने आई थीं.
इस मुलाकात के दौरान ट्रंप ने लाइव कैमरों की अनुमति नहीं दी, लेकिन व्हाइट हाउस की ओर से एक तस्वीर जारी की गई, जिसमें मचाडो उन्हें पदक सौंपती नजर आईं. दक्षिणपंथी नेता मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार वेनेजुएला में विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए दिया गया था.
मचाडो ने 2023 में वेनेजुएला के विपक्ष की राष्ट्रपति प्राथमिक चुनाव में जीत हासिल की थी और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रपति मादुरो को चुनौती देने की प्रमुख दावेदार के रूप में उभरी थीं.
हालांकि, वेनेजुएला की सर्वोच्च अदालत ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक को बरकरार रखा. सरकार का आरोप है कि उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों का समर्थन किया और देश की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने में भूमिका निभाई.
वॉशिंगटन यात्रा के दौरान मचाडो ने कहा कि उन्होंने यह पदक ट्रंप को “हमारी स्वतंत्रता के लिए उनके अद्वितीय समर्पण के सम्मान” के रूप में दिया. बाद में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार उनके पास छोड़ दिया है.
इस बीच, नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान ने दोहराया कि एक बार दिया गया शांति पुरस्कार न तो साझा किया जा सकता है और न ही स्थानांतरित किया जा सकता है. नोबेल फाउंडेशन के नियमों के अनुसार, पुरस्कार का अधिकार केवल उसी व्यक्ति के पास रहता है, जिसे वह दिया गया हो.