अमेरिका-ईरान आगामी बैठक पर विरोधाभास
दोहा/तेहरान . डेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आगामी बैठक को लेकर दोनों देशों के दावों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है. अमेरिकी दावों के विपरीत, ईरान ने स्पष्ट किया है कि दोहा में दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की उच्च स्तरीय राजनीतिक बातचीत नहीं होगी. ईरान वहां केवल एक तकनीकी टीम भेज रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन की समीक्षा करना है.
ईरान का आरोप है कि इस समझौते को लागू करने की गति बेहद धीमी है, जिसे लेकर उसे गंभीर आपत्तियां हैं.
इस तकनीकी बैठक में दक्षिण लेबनान में संघर्षविराम से जुड़ी धारा-1 और होर्मुज जलडमरूमनध्य में यातायात प्रबंधन से संबंधित धारा-5 पर मुख्य रूप से चर्चा होगी. दोनों देशों के बीच धारा-5 की व्याख्या को लेकर बड़ा मतभेद है.
ईरान का मानना है कि अंतिम समझौते से पहले 60 दिनों की बातचीत के दौरान उसे इस क्षेत्र में यातायात को व्यवस्थित करने का अधिकार है, जबकि अमेरिका का कहना है कि ईरान को इस यातायात में कोई दखल नहीं देना चाहिए. इसके अलावा, ईरान ओमान की ओर से बिना उसकी सहमति के बनाए जा रहे नए समुद्री मार्गों को भी समझौते का उल्लंघन मान रहा है.
फ्रांस और ओमान की भूमिका पर भी तनातनी
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष ज्यां-नोएल बैरो के साथ फोन पर इस 'एमओयू' और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की है. हालांकि, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पेरिस, ओमान के साथ मिलकर होर्मुज जलडमरूमनध्य में बारूदी सुरंगें हटाने पर काम कर रहा है.
इस पर ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में सुरक्षा और सुरंगें हटाने की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ ईरान की है और वे किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देंगे.
दूसरी ओर, ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अलबुसैदी ने स्पष्ट किया है कि उनका देश होर्मुज जलडमरूमनध्य से गुजरने वाले जहाजों पर कोई 'पारगमन शुल्क' लगाने के पक्ष में नहीं है.
हालांकि, उन्होंने समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नेविगेशन सेवाओं के बदले स्वैच्छिक शुल्क लेने का सुझाव दिया है, जिसके लिए उन्होंने मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमनध्य के मौजूदा मॉडलों का हवाला दिया.
इस दोहा बैठक में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस लेने पर भी बात होगी, जिसमें कतर में रोकी गई 6 अरब डॉलर की राशि की पहली किस्त जारी होना शामिल है.