AI का भी निरस्त्रीकरण जरूरी- पोप लियो XIV
वेटिकन सिटी । डेस्क: कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो XIV ने अपने पहले विश्वपत्र (Encyclical) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया को आगाह किया है. उन्होंने कहा कि युद्ध और अन्य मानवीय गतिविधियों में AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इस तकनीक का 'निरस्त्रीकरण' बेहद जरूरी है. 'मैग्नीफिका ह्यूमैनिटास: ऑन सेफगार्डिंग द ह्यूमन पर्सन इन द टाइम ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' शीर्षक वाले इस ऐतिहासिक दस्तावेज में पोप ने एल्गोरिदम और बड़े डेटासेट की अंधी दौड़ पर चिंता जताई है.
भू-राजनीतिक और व्यावसायिक दबदबे की होड़ पर चिंता
पोप लियो XIV ने चेतावनी दी कि वर्तमान में एआई कंपनियों और शक्तिशाली देशों के बीच "भू-राजनीतिक या व्यावसायिक प्रभुत्व" हासिल करने की खतरनाक होड़ चल रही है. लगभग 43,000 शब्दों के इस विस्तृत पत्र में पोप ने जोर देकर कहा कि इस शक्तिशाली तकनीक को पूरी तरह से निजी हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता. उन्होंने वैश्विक नीति निर्माताओं से अपील की है कि वे एआई की गति को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय राजनीतिक कदम उठाएं.
युद्ध में AI के इस्तेमाल पर पाबंदी की मांग
हालिया वैश्विक संघर्षों, जैसे कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में एआई टूल्स और 'लैवेंडर' व 'गॉस्पेल' जैसे इजरायली एआई सिस्टम द्वारा सैन्य लक्ष्य तय करने की खबरों पर पोप ने गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि युद्ध में एआई का उपयोग सख्त नैतिक सीमाओं के अधीन होना चाहिए.
"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब निरस्त करने की आवश्यकता है. परमाणु ऊर्जा की तरह ही, इसे भी वर्चस्व और विनाश का साधन बनने से रोककर पूरी मानवता के कल्याण में लगाया जाना चाहिए." - पोप लियो XIV
उन्होंने स्पष्ट किया कि घातक हथियारों से जुड़े फैसले किसी तकनीक या एल्गोरिदम के भरोसे छोड़ना कतई स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने ट्रंप प्रशासन के 'जस्ट वॉर' के सिद्धांत को पुराना और अप्रासंगिक बताया.
एआई डेवलपर्स की नैतिक जिम्मेदारी और नौकरियों का संकट
इस पत्र के विमोचन के दौरान वेटिकन में अमेरिकी एआई कंपनी 'एंथ्रोपिक' के सह-संस्थापक क्रिस्टोफर ओलाह भी मौजूद थे. पोप ने कहा कि एआई डेवलपर्स की एक विशेष नैतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी होती है, क्योंकि उनका हर तकनीकी फैसला मानवता के भविष्य को तय करता है.
लेख में टेक सेक्टर में बड़े पैमाने पर हो रही छंटनी (जैसे अमेज़न द्वारा हाल ही में की गई कटौती) और एआई डेटा सेंटरों के कारण भारत जैसे देशों में लोगों के विस्थापन का भी जिक्र किया गया. पोप ने मजबूत कानूनी ढांचे, स्वतंत्र निगरानी और उपयोगकर्ताओं को जागरूक करने की वकालत की ताकि बच्चों को इसके खतरों से बचाया जा सके और बड़े पैमाने पर रोजगार के नुकसान को रोका जा सके.
इतिहास में पहली बार: गुलामी के लिए वेटिकन ने मांगी माफी
एआई के अलावा, पोप लियो XIV ने इस विश्वपत्र में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया. उन्होंने 15वीं शताब्दी में वेटिकन के उन आदेशों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, जिन्होंने यूरोपीय शासकों को अफ्रीका और अमेरिका पर कब्जा करने और गैर-ईसाइयों को गुलाम बनाने की अनुमति दी थी.
पोप ने लिखा, "ईसाई स्मृति में यह एक ऐसा घाव है जिससे हम खुद को अलग नहीं कर सकते. इसके लिए, चर्च की ओर से, मैं ईमानदारी से क्षमा मांगता हूं." इतिहासविदों ने पोप के इस बयान को श्वेत वर्चस्ववाद के इतिहास में वेटिकन की भूमिका को स्वीकार करने और सुधार की दिशा में एक "ऐतिहासिक कदम" बताया है.
क्यों महत्वपूर्ण है पोप का यह संदेश?
यह इतिहास में पहली बार है जब किसी पोप ने 'बिग टेक' (बड़ी तकनीकी कंपनियों) के खिलाफ खड़े होने को अपने पूरे विश्वपत्र का मुख्य केंद्र बिंदु बनाया है. इससे पहले पोप फ्रांसिस और पोप बेनेडिक्ट XVI ने भी तकनीक के मानवीय चेहरे पर बात की थी, लेकिन लियो XIV ने इसे सीधे धार्मिक मार्गदर्शन और वैश्विक कानून की आवश्यकता से जोड़ दिया है, जो दुनिया भर के 1.4 अरब कैथोलिक ईसाइयों के लिए एक नैतिक दिशा-निर्देश का काम करेगा.