डीजल संकट: वैश्विक तनाव की आंच पहुंची छत्तीसगढ़ के खेतों तक
जगदलपुर । संवाददाता: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते तनाव का सीधा असर अब छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों की कृषि व्यवस्था पर पड़ने लगा है. वैश्विक उथल-पुथल के चलते क्षेत्र में डीजल की भारी किल्लत हो गई है, जिसने खरीफ सीजन की तैयारियों में जुटे अन्नदाताओं की चिंता को दोगुना कर दिया है.
मुंडा, लवन और लाहोद जैसे कृषि प्रधान क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही ट्रैक्टरों और भारी वाहनों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं.
हाल ही में 13 और 14 मई को हुई तेज बारिश के बाद किसानों ने खेतों की अकरस जुताई का काम तेजी से शुरू किया था. मुंडा के स्थानीय कृषक मोरजध्वज वर्मा बताते हैं कि इस समय धान के सीजन के लिए खेतों को तैयार करना बेहद जरूरी है, लेकिन ईंधन की भारी कमी के कारण यह काम पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है.
मई के महीने में ही ईंधन की कीमतों में चार बार (15, 19, 22 और 25 मई) बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है, इसके बावजूद पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सुधरने का नाम नहीं ले रही है.
आपूर्ति में कमी को देखते हुए कई पेट्रोल पंप संचालकों ने ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी है, जिसके तहत प्रति वाहन केवल 1000 से 1500 रुपये तक का ही डीजल दिया जा रहा है.
लच्छनपुर के रहने वाले तिलक राम रजक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें महज 1500 रुपये का डीजल मिल पाया, जबकि इतनी राशि का तेल तो गांव से पंप तक आने-जाने में ही खर्च हो जाता है.
ईंधन संकट के बीच कई जगहों पर अव्यवस्था और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. कुछ ग्रामीणों ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि रात के वक्त कुछ चुनिंदा पंपों पर निर्धारित दर से अधिक की वसूली की जा रही है, जहां 1000 रुपये का डीजल देने के बदले अतिरिक्त 100 रुपये वसूले जा रहे हैं, हालांकि प्रशासन द्वारा इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
इधर मंगलवार की सुबह लाहोद के एक पेट्रोल पंप पर 50 से ज्यादा ट्रैक्टरों की कतार लगने के कारण मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बन गई. चिलचिलाती धूप में परेशान हो रहे वाहन चालकों और किसानों में अब प्रशासनिक ढुलमुल रवैए को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है.