छात्रों को 'आतंकवादी' बताने पर शिक्षा मंत्री से माफी की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर देश में सियासी घमासान तेज हो गया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से छात्र प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर आतंकवादियों की "बी-टीम" कहने के लिए तुरंत माफी मांगने की मांग की है.
रायबरेली के सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर सत्ता के अहंकार में डूबे होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो कोई भी सरकार से सवाल पूछता है, उसे 'देशद्रोही' या 'आतंकवादी' करार दे दिया जाता है. उन्होंने कहा कि किसानों को 'परजीवी' और अब हक की आवाज उठाने वाले युवाओं को 'आतंकवादी' कहा जा रहा है, जो कि बेहद निंदनीय है.
यह पूरा विवाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस्तीफा मांग रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनकारियों को आतंकवादियों की बी-टीम और जनता द्वारा खारिज किए गए लोग बताया था.
इस पर पलटवार करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि युवा आतंकवादी नहीं हैं. उन्होंने शिक्षा मंत्री पर देश के युवाओं का अपमान करने और परीक्षा के तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले मासूम छात्रों की मौतों के लिए जिम्मेदार होने का गंभीर आरोप लगाया.
इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि देश में 90 के करीब पेपर लीक हो चुके हैं और हाल ही में नीट पेपर लीक के चलते कई बच्चों ने अपनी जान गंवा दी है, लेकिन शिक्षा मंत्री अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं. विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी कमियां छिपाने के लिए आलोचकों और छात्रों को राष्ट्रविरोधी बता रही है.
इस बीच, कांग्रेस ने पेपर लीक और देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 30 जून से 40 दिनों के देशव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' का ऐलान किया है, जो 9 अगस्त को दिल्ली में एक बड़े विरोध मार्च के साथ समाप्त होगा.
महाराष्ट्र के कांग्रेस नेता सतेज पाटिल और केरल के उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने भी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के आयोजन में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं.
विपक्ष का कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से देश के लाखों छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है और अब केवल टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से खोई हुई विश्वसनीयता वापस नहीं आएगी.