दिल्ली: कुत्ता काटने और रेबीज पर SC का स्वत: संज्ञान
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आवारा कुत्तों के हमलों और इससे होने वाली रेबीज की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए स्वत: संज्ञान लिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के आधार पर, जस्टिस जे.बी. परदीवाला और आर. महादेवन की बेंच ने इस मुद्दे को "बेहद परेशान करने वाला और चिंताजनक" बताया. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हर दिन कुत्तों के हमले की घटनाएं दर्ज हो रही हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से रेबीज का शिकार हो रहे हैं. बेंच ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उचित आदेश के लिये प्रस्तुत करने का निर्देश दिया.
दिल्ली में आवारा कुत्तों का आतंक
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या अब भयावह रूप ले चुकी है. एक हृदयविदारक घटना में, दिल्ली के पूठ कलां क्षेत्र में छह वर्षीय चावी शर्मा की एक रेबीज संक्रमित आवारा कुत्ते के हमले में मौत हो गई. चावी को 30 जून को कुत्ते ने काटा था, और इलाज के बावजूद उनकी हालत बिगड़ती गई. सरकारी अस्पतालों में देरी और रेफरल के बाद, 26 जुलाई को एक निजी अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई. परिवार ने नगर निगम अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज की है.
एक अन्य मामले में, दिल्ली के अलीपुर क्षेत्र में चार साल के अभिषेक राय पर 23 जुलाई को आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया. चेहरे पर काटे जाने के बाद, उसे राहगीरों ने बचाया और रेबीज के इलाज के लिए राजा हरिश्चंद्र अस्पताल ले जाया गया. अभिषेक की मां गुरिया देवी ने बताया कि यह उनके बेटे पर तीसरा हमला था. स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस घटना के बाद ही प्रशासन ने तीन कुत्तों को पकड़ा, लेकिन स्थानीय लोग अब भी डरे हुए हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं.
निष्क्रिय नीतियां और समाधान की कमी
रिपोर्ट में बताया गया कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और संघर्ष-निवारण के प्रयास नाकाम रहे हैं. पुराने पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023, संसाधनों की कमी, और पशु अधिकार समूहों का विरोध इसकी राह में बाधा बन रहा है. मुस्तफाबाद, मुखर्जी नगर और कालकाजी जैसे क्षेत्रों में हर साल सैकड़ों काटने की घटनायें दर्ज होती हैं, लेकिन शिकायत करने वालों को अक्सर ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है. नगर निगम ने योजनाओं का वादा किया है, लेकिन अपर्याप्त संसाधन, बकाया भुगतान, और कुत्तों की गणना की कमी से प्रगति रुकी हुई है.