निडाल हसन की लाइव फांसी का फैसला: US और UN में भारी विरोध
वाशिंगटन । डेस्क: वर्ष 2009 के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुए गोलीबारी कांड के दोषी पूर्व अमेरिकी सेना प्रमुख और मनोचिकित्सक निडाल हसन की फांसी की सजा को लेकर अमेरिका की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ द्वारा दोषी की सजा का सीधा प्रसारण (लाइव-स्ट्रीमिंग) करने के ऐलान के बाद उनकी चौतरफा आलोचना हो रही है. विपक्षी नेताओं के साथ-साथ खुद सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के कई वरिष्ठ सांसदों और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है.
राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री हेगसेथ के इस फैसले को लेकर अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में तीखा आक्रोश देखने को मिल रहा है. रिपब्लिकन सांसद थॉम टिलिस ने इस फैसले पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि मौत की सजा का सार्वजनिक रूप से सीधा प्रसारण करना अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. उन्होंने इसकी तुलना तानाशाही देशों की व्यवस्था से की. वहीं, प्रतिनिधि सभा की सशस्त्र सेवा समिति से जुड़े सांसद ऑस्टिन स्कॉट ने टिप्पणी की कि अमेरिका को न्याय की प्रक्रिया में ऐसी अनुचित प्रथाओं को जगह नहीं देनी चाहिए. दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक सांसद जैक रीड और क्रिस मर्फी ने इसे एक पब्लिसिटी स्टंट करार देते हुए कहा कि यह कदम अमेरिकी साख को नुकसान पहुँचाने वाला है और इस पर सरकार को तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए.
सेना के नियम और राष्ट्रपति की मंजूरी
अमेरिकी सेना की मौजूदा नीति के तहत किसी भी सैन्य सजा-ए-मौत को देखने के लिए सीमित लोगों को ही अनुमति दी जाती है. इसमें मुख्य रूप से पीड़ितों के परिजन, वकील और मीडिया के चुनिंदा प्रतिनिधि शामिल होते हैं. इसके अलावा 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को इसे देखने की इजाजत नहीं होती. कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस निष्पादन का सार्वजनिक प्रसारण करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से विशेष छूट की आवश्यकता होगी. हालाँकि, व्हाइट हाउस ने इस मामले में सभी सवालों का जवाब देने की जिम्मेदारी पेंटागन पर छोड़ दी है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध और संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
अमेरिकी राजनीति के अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घोषणा का व्यापक विरोध शुरू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है. यूएन का कहना है कि सजा-ए-मौत का इस तरह से सार्वजनिक प्रदर्शन किया जाना अमानवीय है और यह प्रताड़ना के खिलाफ वैश्विक नियमों के विपरीत है. इन तमाम विरोधों के बावजूद कुछ रूढ़िवादी सांसद इस फैसले के समर्थन में भी नजर आ रहे हैं, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर अमेरिका का राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है.