अब अमेरिका के निशाने पर क्यूबाई डॉक्टर
ग्वाटेमाला सिटी । डेस्क: अमेरिका ने क्यूबा की विदेशी चिकित्सा मिशनों पर अपना दबाव और तेज कर दिया है. ट्रंप प्रशासन इन मिशनों को "जबरन श्रम" और "मानव तस्करी" का रूप बताते हुए क्यूबाई सरकार की सबसे बड़ी विदेशी आय के स्रोत को पूरी तरह बंद करने की कोशिश में जुटा है.
ग्वाटेमाला ने हाल ही में घोषणा की कि वह अपने यहां चल रहे 30 साल पुराने क्यूबाई डॉक्टर कार्यक्रम को इस साल के दौरान धीरे-धीरे समाप्त कर देगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में 412 क्यूबाई स्वास्थ्यकर्मी (जिनमें 333 डॉक्टर शामिल हैं) देश में काम कर रहे हैं. ये डॉक्टर मुख्य रूप से ग्रामीण और गरीब इलाकों में सेवाएं देते थे, जहां स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर है.
अमेरिकी दबाव के कारण यह फैसला लिया गया है. ट्रंप सरकार ने पिछले साल से ही विदेशी सरकारों पर वीजा प्रतिबंध लगाकर और आर्थिक दबाव बनाकर क्यूबाई मेडिकल ब्रिगेड को खत्म करने की मुहिम चलाई है.
ग्वाटेमाला के अलावा पैराग्वे, बहामास, एंटीगुआ एंड बारबुडा और गुयाना जैसे कई देश पहले ही इस कार्यक्रम से बाहर हो चुके हैं या बदलाव कर रहे हैं. कुछ देश अब क्यूबाई डॉक्टरों को सीधे भुगतान करने की योजना बना रहे हैं, ताकि पैसा हवाना की सरकार तक न पहुंचे.
क्यूबा के लिए ये मिशन आय का प्रमुख स्रोत हैं. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल इनसे लगभग 7 अरब डॉलर की कमाई हुई थी. विदेशी सरकारें क्यूबाई डॉक्टरों के लिए हवाना को सीधे भुगतान करती हैं, जिसका बड़ा हिस्सा सरकार के खजाने में जाता है.
अमेरिका का दावा है कि डॉक्टरों को कम वेतन मिलता है और वे जबरन भेजे जाते हैं, हालांकि इसके ठोस सबूत नहीं दिए गए हैं.
ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला से क्यूबा को तेल की आपूर्ति भी रोक दी है, जिससे क्यूबा में ईंधन, बिजली, भोजन और दवा की गंभीर कमी हो गई है. अब ग्वाटेमाला जैसे देशों का कार्यक्रम छोड़ना हवाना के लिए और बड़ा आर्थिक झटका साबित हो रहा है.
क्यूबा इन मिशनों को "अंतरराष्ट्रीय एकजुटता" का प्रतीक मानता है और दावा करता है कि ये डॉक्टर दुनिया भर के गरीब इलाकों में मुफ्त या कम खर्च में स्वास्थ्य सेवाएं देते हैं. लेकिन अमेरिकी नीतियों के चलते कई देश अब पीछे हट रहे हैं, जिससे क्यूबाई "श्वेत कोट सेना" का वैश्विक विस्तार सिकुड़ता जा रहा है.