UN के मंच से क्यूबा ने 'तेल नाकाबंदी' को बताया अमानवीय
न्यूयार्क । डेस्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से क्यूबा और अमेरिका के बीच जारी पुराना तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिका द्वारा लागू की गई 'तेल नाकाबंदी' की तीखी आलोचना की है. उन्होंने इसे सामूहिक दंड की ऐसी साजिश करार दिया, जिसका मकसद देश में गंभीर मानवीय संकट पैदा करना है.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुनता है, तो इसके गंभीर और विनाशकारी परिणाम होंगे. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबा समानता और बिना किसी पूर्व शर्त के अमेरिका के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत के लिए हमेशा तैयार है.
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में भरोसा जताया कि दोनों देश जल्द ही किसी समझौते पर पहुंच जाएंगे. ट्रंप ने कहा कि इस मामले में सैन्य बल के प्रयोग की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि क्यूबा की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और अमेरिका उसकी मदद करना चाहता है.
इससे पहले, ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के दौरान क्यूबा को विफल राष्ट्र बताते हुए वहां जल्द आजादी आने का दावा किया था, जिसके विरोध में क्यूबा के प्रतिनिधिमंडल ने वाकआउट कर दिया था.
अमेरिका पिछले छह दशकों से क्यूबा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए है, लेकिन हालिया तेल नाकाबंदी ने द्वीप देश की कमर तोड़ दी है.
इसके कारण क्यूबा में भारी ईंधन किल्लत, लगातार बिजली कटौती और बुनियादी खाद्य आपूर्ति का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. वैश्विक स्तर पर भी अमेरिका के इस कड़े रुख की आलोचना हो रही है.
ब्राजील, मेक्सिको और पाकिस्तान जैसे देशों ने इन एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध करते हुए नाकाबंदी समाप्त करने की मांग की है. उल्लेखनीय है कि वर्ष 1992 से संयुक्त राष्ट्र महासभा भी हर साल भारी बहुमत से अमेरिका से क्यूबा पर लगे इस आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध को खत्म करने का प्रस्ताव पारित करती रही है.