अंधेरे में डूबा क्यूबा, राष्ट्रपति ने कहा- 'नरसंहार ऊर्जा नाकाबंदी'
हवाना । डेस्क: क्यूबा इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा संकटों में से एक का सामना कर रहा है. द्वीप की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा ईंधन भंडार पूरी तरह समाप्त होने की घोषणा के बाद देश के बड़े हिस्से में बिजली गुल हो गई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है. राजधानी हवाना सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस स्थिति के खिलाफ दुर्लभ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.
गुरुवार को पूर्वी क्यूबा का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह अंधेरे में डूब गया, जबकि पश्चिमी क्षेत्रों में बिजली कटौती के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए. ऊर्जा मंत्री विसेंट डी ला ओ लेवी ने एक संवाददाता सम्मेलन में स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि देश के पास डीजल और तेल का स्टॉक शून्य हो चुका है.
वर्तमान में क्यूबा केवल अपने स्वयं के कुओं से निकलने वाली गैस और घरेलू कच्चे तेल पर निर्भर है, लेकिन यह बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है.
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने इस गहराते संकट के लिए सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने इसे एक 'नरसंहार ऊर्जा नाकाबंदी' करार देते हुए कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ईंधन आपूर्ति करने वाले देशों को दी जाने वाली धमकियों के कारण क्यूबा अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन खरीदने में असमर्थ है.
राष्ट्रपति के अनुसार, शाम के समय जब बिजली की मांग चरम पर होती है, तब देश को 2,000 मेगावाट से अधिक की कमी का सामना करना पड़ रहा है. ईंधन की कमी के कारण बुधवार को ही लगभग 1,100 मेगावाट बिजली उत्पादन ठप हो गया था.
बिजली की इस भारी किल्लत ने आम जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है. हवाना के बाहरी इलाकों, जैसे सैन मिगुएल डेल पाड्रोन और प्लाया में निवासियों ने बर्तनों को पीटकर अपना विरोध दर्ज कराया. लोग 'बिजली चालू करो' के नारे लगाते हुए अपनी हताशा व्यक्त कर रहे हैं.
कुछ क्षेत्रों में तो बिजली कटौती का समय 19 घंटे से भी अधिक हो गया है, जबकि कई प्रांतों में पूरे-पूरे दिन अंधेरा छाया रहता है. क्यूबा का बिजली ग्रिड आठ पुराने थर्मोइलेक्ट्रिक संयंत्रों पर टिका है, जिनमें से कई 40 साल से अधिक पुराने हैं और अक्सर रखरखाव की कमी के कारण खराब हो जाते हैं.
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा को 100 मिलियन डॉलर की सहायता का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके साथ एक कड़ी शर्त जोड़ी गई है कि यह सहायता सरकार के बजाय कैथोलिक चर्च के माध्यम से वितरित की जाएगी.
क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज ने इस पर सावधानीपूर्वक प्रतिक्रिया देते हुए चर्चा के लिए खुले होने का संकेत दिया है.
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा क्यूबा पर राजनीतिक बदलाव के लिए दबाव बढ़ाने के बयानों ने भविष्य की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है. भोजन, दवा और बुनियादी सामानों की पहले से मौजूद कमी के बीच इस ऊर्जा संकट ने क्यूबा के नागरिकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है.