बिजली कटौती से खेतों में पड़ने लगी दरार
छत्तीसगढ़ में बिजली कटौती से खेतों में पड़ने लगी दरार
बेमेतरा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में रवि फसल लेने वाले किसानों के माथे पर अभी से परेशानी की लकीरें गहराती जा रही है.
यहां के किसान बिजली कटौती से परेशान हैं. किसान रोपाई कर तैयार हुए हैं और अभी से बिजली की आंख मिचौली से खेत सूखने लगे हैं.
इससे आक्रोशित किसानों ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है.
साथ ही किसानों ने चेतावनी दी है कि बिजली कटौती बंद नहीं की गई तो शीघ्र ही आंदोलन किया जाएगा.
रांका सहित क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में इन दिनों किसान रवि की फसल लगाए हुए हैं.
किसानों को अटल ज्योति योजना के अंतर्गत 18 घंटा बिजली की आपूर्ति की जानी चाहिए.
लेकिन इसके विपरित 18 घंटे की अघोषित कटौती की जा रही है.
किसानों को मात्र 6 घंटे ही बिजली मिल रही है, जिसके चलते खेत सूख रहे हैं और फसल को नुकसान पहुंच रहा है.
किसानों ने बताया कि फसल को बचाने सिंचाई ही एक मात्र साधन है, लेकिन बिजली कटौती के कारण वे मोटर पंप नहीं चला पा रहे हैं.
पानी होते हुए भी खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं. पानी के अभाव में खेत फटने लगे हैं.
किसानों का कहना है कि रवि फसल के लिए रोज फसलों को पानी चाहिए.
वर्तमान में स्थिति ऐसी हो गई है कि एक दिन में एक एकड़ फसल की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं.
बिजली की स्थिति को देखते हुए फसल को बचाने के लिए रोज पाइप लाइन को बदलना पड़ रहा है.
अलग-अलग खेतों में पानी चलाना पड़ रहा है. स्थिति ऐसी हो गई है कि एक तरफ सिंचाई करते हैं तो दूसरे तरफ का खेत सूख जा रहा है.
बिजली विभाग की बेरुखी की चलते फसल तैयार होने से पहले ही बर्बादी की कगार पर पहुंच रही है.
किसानों में आक्रोश इस बात का भी है कि गांव में जबरदस्ती थोपे जा रहे एथेनाल प्लांट को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है.
जबकि किसानों को खेती तक के लिए बिजली नहीं दी जा रही है.
किसानों का कहना है कि उनकी शिकायतों पर अमल नहीं किया गया और निर्धारित समय सीमा के अंदर 18 घंटे नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती है तो किसान सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे.
एथेनाल प्लांट विस्थापन के लिए किसान संघर्ष तो कर ही रहे हैं, अब फसल बचाने के लिए उससे बड़ा आंदोलन किया जाएगा.