नासिक के TCS ऑफिस में धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़
नई दिल्ली । डेस्क: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के बीपीओ परिसर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस ने एक संदिग्ध धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश किया है. इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि पुलिस ने सच्चाई का पता लगाने के लिए महिला कांस्टेबलों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कैंपस के भीतर तैनात किया था.
इस गुप्त मिशन के बाद जो तथ्य सामने आए, उसने सुरक्षा एजेंसियों और आईटी जगत को हिला कर रख दिया है. अब तक इस मामले में 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और जांच का दायरा अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक पहुंच गया है.
जांच के अनुसार, यह रैकेट पिछले दो-तीन वर्षों से सक्रिय था. विशेष जांच दल के सूत्रों ने बताया कि अब तक 12 कर्मचारियों की पहचान पीड़ितों के रूप में की गई है, जिनमें से 9 लोगों ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है.
शिकायतकर्ताओं में 8 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं. इन पीड़ितों ने सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न, शादी का झांसा देकर बलात्कार, धार्मिक हेरफेर और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. पीड़ितों की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच है, जिन्होंने बताया कि उन्हें जबरन इस्लामी प्रथाओं को अपनाने के लिए मजबूर किया जाता था.
इस मामले के तार अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ते दिख रहे हैं. पुलिस को व्हाट्सएप चैट के जरिए 'इमरान' नामक एक संदिग्ध व्यक्ति का पता चला है, जिसका संबंध मलेशिया से बताया जा रहा है. जांचकर्ताओं को संदेह है कि वह एक प्रचारक है जो वीडियो कॉल के जरिए कर्मचारियों से संपर्क करता था.
वह महिलाओं को विदेश में मोटी सैलरी वाली नौकरी और बेहतर जीवनशैली का लालच देकर प्रभावित करने की कोशिश करता था. एसआईटी डिजिटल सबूतों और डिलीट किए गए व्हाट्सएप संदेशों को फॉरेंसिक टूल्स की मदद से रिकवर कर रही है, ताकि इस साजिश की गहराई का पता लगाया जा सके.
अरेस्ट किए गए आरोपियों में टीम लीडर और इंजीनियर स्तर के अधिकारी शामिल हैं. वहीं, कंपनी की एचआर मैनेजर निदा खान फिलहाल फरार है. पुलिस निदा खान की भर्ती प्रक्रिया और संगठन के भीतर उसकी भूमिका की गहनता से जांच कर रही है.
आरोप है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से टारगेट सेट किए थे और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए अपनी रणनीतियां साझा करते थे. महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया है कि लड़कियों को नौकरी और ऊंचे वेतन का झांसा देकर नमाज पढ़ने और रोजा रखने के लिए मजबूर किया गया.
इस पूरे घटनाक्रम पर टीसीएस (TCS) ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कंपनी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति है और जांच के दायरे में आए सभी संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है.
फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नाम इस रैकेट में सामने आ सकते हैं. नासिक पुलिस की इस कार्रवाई ने कॉर्पोरेट जगत में कर्मचारियों की सुरक्षा और आंतरिक कार्य संस्कृति पर एक नई बहस छेड़ दी है.