अनुकंपा नियुक्ति मिलने पर भी मिलेगा सड़क दुर्घटना का मुआवजा- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना के एक मामले में पीड़ित परिवार के पक्ष में बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने न केवल पीड़ित परिवार को मिलने वाली मुआवजे की राशि में 4.03 लाख रुपये की बढ़ोतरी की है, बल्कि बीमा कंपनी की उस दलील को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाले सदस्य को मुआवजा पाने का अधिकार नहीं होता. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब परिवार को कुल 87.03 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा.
यह आदेश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने महासमुंद जिले के निवासी रामकृष्ण बंछोर की 2018 में एक सड़क हादसे में हुई मौत से जुड़ी दो अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया.
इससे पहले सरायपाली के अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को पीड़ित परिवार को 82.99 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था. बीमा कंपनी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि मृतक के बेटे प्रमोद कुमार बंछोर को सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी है, इसलिए वह मुआवजे का हकदार नहीं है.
बीमा कंपनी की इस दलील को खारिज करते हुए जस्टिस अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति एक सेवा शर्त (Service Condition) है, जो संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को संबल देने के लिए दी जाती है.
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी नौकरी को दुर्घटना में हुई मौत के बदले मिलने वाला कोई 'आर्थिक लाभ' (Pecuniary Advantage) नहीं माना जा सकता और न ही इसके आधार पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले दावे को खारिज या कम किया जा सकता है.
दूसरी ओर, पीड़ित परिवार ने भी मुआवजे की राशि बढ़ाने के लिए अपील दायर की थी. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की गणना मृतक की वास्तविक ग्रॉस सैलरी 84,622 रुपये के बजाय 81,500 रुपये प्रति माह मानकर की थी. इस मामले में सरायपाली के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल के अकाउंटेंट ने जुलाई 2018 की सैलरी स्लिप के आधार पर वास्तविक वेतन की पुष्टि की थी.
हाई कोर्ट ने परिवार की इस दलील को स्वीकार करते हुए संशोधित आय के आधार पर मुआवजे की नई गणना की. इसके बाद कोर्ट ने ट्रिब्यूनल द्वारा तय किए गए 82.99 लाख रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 87.03 लाख रुपये कर दिया.
अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह बढ़ी हुई 4.03 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि तीन महीने के भीतर जमा करे. इस अतिरिक्त राशि पर 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज भी देय होगा, जिसकी गणना 6 अक्टूबर 2018 (जब मूल दावा आवेदन दायर किया गया था) से लेकर भुगतान की तारीख तक की जाएगी.