प्राथमिक विद्यालय में चल रहा महाविद्यालय
दंतेवाड़ा | संवादतादाः छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण ब्लॉक में स्थित हिड़मा मांझी शासकीय महाविद्यालय पिछले 8 साल से प्राथमिक शाला के भवन में संचालित हो रहा है.
इस बीच प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा की दो सरकारें आईं, लेकिन महाविद्यालय के लिए भवन पूरा नहीं करवा सकी. जबकि 2017 में भवन निर्माण के लिए करीब 8 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ है.
इसी वजह से करीब 270 सीट क्षमता के कॉलेज में महज 89 छात्र ही हैं. जिसमें से नव प्रवेशी छात्रों की संख्या 25 है.
इस महाविद्यालय का संचालन दो नियमित कर्मचारियों के भरोसे है. जिसमें एक असिस्टेंट प्रॉफेसर और दूसरा लैब तकनीशियन है. बाकी कर्मचारी गेस्ट हैं.
पिछले आठ सालों से बन रही भवन अभी भी निर्माणाधीन है. अब तो भवन बना रहे ठेकेदार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं.
इस संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत का कहना है कि कॉलेज निर्माण का काम फिलहाल रद्द कर दिया गया है. दोबारा से टेंडर प्रक्रिया होगी उसके बाद काम शुरू करवाया जाएगा.
पीडब्ल्यूडी के एसडीओ भोरिया कहते हैं पूरा काम लगभग आठ करोड़ का है. कॉलेज इमारत का कार्य रद्द हो चुका है, इसका दोबारा टेंडर होगा. वहीं हॉस्टल निर्माणाधीन है. इस कार्य को अब जल्द ही पूरा करवाया जाएगा.
छोटे परिसर में शिक्षा देना बड़ी चुनौती
असिस्टेंट प्रॉफेसर शैलेन्द्र ध्रुव का कहना है कि बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इस कॉलेज में सिर्फ वही और एक महिला लैब तकनीशियन नियमित हैं. बाकी गेस्ट टीचर से सेवाएं ली जाती हैं. उन्हें भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं.
उन्होंने बताया कि विज्ञान, कला और कॉमर्स तीनों संकाय के विद्याथियों को इस छोटे से परिसर में शिक्षा देना बड़ी चुनौती है. पिछले आठ सालों से प्राथमिक विद्यालय में महाविद्यालय चल रहा है. मूलभूत सुविधाएं भी नहीं है. किसी तरह से सिर्फ संचालित हो रहा है.
75 किमी के दायरे में कोई कॉलेज नहीं
इस कॉलेज का सही संचालन होता तो मील का पत्थर साबित होता. इस क्षेत्र के चोरों ओर की परिधि को देखा जाए तो 70 से 75 किमी के दायरे में कोई कॉलेज नहीं है.
सुकमा और कटेकल्याण के बीच के जंगल में दर्जनों पंचायत हैं. इन पंचायतों में 12वीं पास करने के बाद छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं.
यदि बेहतर पढ़ाई और हॉस्टल की व्यवस्था सरकार करती तो निश्चित तौर पर इस इलाके की तस्वीर बदल जाती.
सुकमा के तोंगपाल से लेकर कुआकोंडा और कटेकल्याण के आदिवासी छात्रों को भटकना नहीं पड़ता.
छोटे बच्चों को खेलने मैदान नहीं मिलता
प्राथमिक शाला के शिक्षकों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज का संचालन एक परिसर में होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
छोटे बच्चों को ज्यादा तकलीफ है. मैदान एक होने से छोटे बच्चों को खेलने को नहीं मिलता.
मजबूरी में बच्चे पेड़ के नीचे बैठ जाते हैं और कॉलेज के छात्रों को खेलते हुए देखते रहते हैं. इस स्कूल में 24 बच्चे पढ़ रहे हैं.
आठ करोड़ का प्रोजेक्ट आठ सालों से अधूरा
2017 में भाजपा सरकार ने आनन-फानन में इस महाविद्यालय का संचालन करवा दिया.
साथ ही भवन और हॉस्टल के लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी कर दी.
गल्स और ब्यॉज दोनों के लिए अलग-अलग हॉस्टल बनाए जाने थे और कॉलेज का निर्माण होना था.
एक हॉस्टल बनने कगार पर है और एक अधूरा है. वहीं कॉलेज इमारत के सिर्फ पिलर खड़े हैं. ठेकेदार ने काम रोक दिया है.