चीन-पाक समझौता अवैध, यह 1962 का भारत नहीं- कविंदर गुप्ता
नई दिल्ली । डेस्क: नई दिल्ली और बीजिंग के बीच बढ़ते कूटनीतिक तनाव के बीच भारतीय थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को शाक्सगाम घाटी को लेकर भारत के रुख को स्पष्ट कर दिया है. जनरल द्विवेदी ने दोटूक शब्दों में कहा कि भारत 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुए समझौते को पूरी तरह अवैध मानता है और इस क्षेत्र में की जा रही किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करता है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है और दो देशों द्वारा किया गया यह कृत्य पूरी तरह गैर-कानूनी है.
भारत का यह कड़ा बयान चीन के उस दावे के बाद आया है जिसमें बीजिंग ने शाक्सगाम घाटी में अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को "त्रुटिहीन" करार दिया था.
नई दिल्ली का स्पष्ट तर्क है कि पाकिस्तान ने 1963 में 5,180 वर्ग किलोमीटर की भारतीय भूमि चीन को अवैध रूप से सौंप दी थी, जो वर्तमान में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है.
इसी मुद्दे पर लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने भी चीन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह यह न भूले कि यह 1962 का भारत नहीं, बल्कि 2026 का 'भारत' है.
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने जम्मू में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चीन की विस्तारवादी नीति अब सफल नहीं होगी और भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने 1994 के संसदीय प्रस्ताव का हवाला देते हुए दोहराया कि पाकिस्तान के कब्जे वाला पूरा जम्मू-कश्मीर (PoJK) भारत का है.
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने अपनी संप्रभुता का सौदा किया है और वहां की सेना बलूचिस्तान व सिंध जैसे क्षेत्रों में अत्याचार कर रही है.
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है और सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण या अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.