चीन ने मादुरो तथा उनकी पत्नी की तुरंत रिहाई की मांग की
बीजिंग । डेस्क: चीन ने रविवार 4 जनवरी, 2026 को अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को जबरन हिरासत में लिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. चीनी विदेश मंत्रालय ने बीजिंग में एक आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका से मांग की है कि मादुरो और उनकी पत्नी को "तुरंत" रिहा किया जाए और वेनेजुएला के मुद्दों का समाधान "संवाद और बातचीत" के जरिए निकाला जाए.
चीन ने इस अमेरिकी कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है.
चीन ने अमेरिका को मादुरो और उनकी पत्नी की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने, वेनेजुएला की सरकार को गिराने की कोशिशें बंद करने और सैन्य हस्तक्षेप के बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है.
इससे पहले शनिवार को भी चीन ने अमेरिकी हवाई हमलों को एक "आधिपत्यवादी कृत्य" करार देते हुए इसकी आलोचना की थी. इस घटनाक्रम पर वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.
रूस और ईरान ने इस सैन्य अभियान की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक संप्रभु राष्ट्र के निर्वाचित राष्ट्रपति के खिलाफ अवैध कार्रवाई बताया है. रूस ने अमेरिकी नेतृत्व से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और मादुरो को रिहा करने की मांग की है.
वहीं, यूरोपीय संघ और फ्रांस जैसे अमेरिकी सहयोगियों ने भी अंतर्राष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर देते हुए इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, हालांकि यूरोपीय संघ ने मादुरो की वैधता पर सवाल भी उठाए हैं.
दूसरी ओर, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि वे इस विकसित होती स्थिति पर अमेरिका के साथ चर्चा करेंगे, साथ ही उन्होंने मादुरो शासन के अंत पर कोई सहानुभूति न होने का संकेत भी दिया.
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस हस्तक्षेप को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा होगी.