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चीन-अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार बनना चाहिए- शी जिनपिंग

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14 मई 2026, 05:32 PM 5 मिनट में पढ़ें 2

शी-ट्रंप
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बीजिंग । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन की आधिकारिक यात्रा के दूसरे दिन विश्व की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच एक नए अध्याय की शुरुआत देखने को मिली है. बीजिंग के 'ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल' में आयोजित एक भव्य राजकीय भोज के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक-दूसरे के सम्मान में टोस्ट पेश किया. दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के आपसी संबंधों को दुनिया का सबसे "परिणामी" यानी महत्वपूर्ण रिश्ता करार दिया. ऐतिहासिक मंदिर 'टेम्पल ऑफ हेवन' के दौरे के बाद शी जिनपिंग ने एक साझा भविष्य की बात कही, लेकिन साथ ही आगाह भी किया कि इस नाजुक बंधन को संभालने में विफलता एक अत्यंत खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती है.


व्यक्तिगत तालमेल और भविष्य की योजनाएं


राजकीय भोज के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग को अपना "मित्र" बताते हुए उनके नेतृत्व की जमकर सराहना की. ट्रंप ने कहा कि उनके मन में चीन और राष्ट्रपति शी के प्रति गहरा सम्मान है और दोनों देश मिलकर एक शानदार भविष्य का निर्माण करेंगे. इस मित्रता को और प्रगाढ़ बनाने के लिए ट्रंप ने शी जिनपिंग और चीन की प्रथम महिला पेंग लियुआन को आगामी 24 सितंबर को व्हाइट हाउस आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया. वहीं, राष्ट्रपति शी ने भी वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में ट्रंप से मुलाकात पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने इतिहास और मानवता के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए और कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियों के नेताओं के रूप में यह उनकी संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे इन सवालों के उत्तर लिखें. बीजिंग में ट्रंप का स्वागत जिस भव्यता के साथ किया गया, वह चीन की कूटनीतिक गंभीरता को दर्शाता है, जहाँ उपराष्ट्रपति हान झेंग स्वयं हवाई अड्डे पर स्वागत के लिए उपस्थित थे.

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रणनीतिक साझेदारी की नई परिभाषा


दोनों देशों के बीच आधिकारिक वार्ता के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि ट्रंप और शी जिनपिंग ने अपने संबंधों को "रचनात्मक, रणनीतिक और स्थिर" ढांचे में ढालने पर सहमति व्यक्त की है. यह नई स्थिति अगले तीन वर्षों और उससे आगे के लिए द्विपक्षीय संबंधों के मार्गदर्शन का काम करेगी. राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की स्थापना के समय से चीन के साथ रहे व्यापारिक संबंधों का स्मरण किया, जबकि शी जिनपिंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय भागीदार बनना चाहिए. शी ने स्पष्ट किया कि आपसी सम्मान ही इन संबंधों की नींव है और साझा हित मतभेदों से कहीं अधिक बड़े हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि साल 2026 चीन-अमेरिकी संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा.


व्यापारिक गतिरोध और नई संभावनाओं पर चर्चा


आर्थिक मोर्चे पर दोनों नेताओं के बीच व्यापारिक असंतुलन और टैरिफ जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा हुई. शी जिनपिंग ने संकेत दिया कि चीन के अवसरों के द्वार और भी चौड़े होंगे, जिससे अमेरिकी प्रशासन को सोयाबीन, गोमांस और विमानों जैसे निर्यात में वृद्धि की उम्मीद है. अमेरिकी अधिकारी अब चीन के साथ व्यापारिक विवादों के प्रबंधन के लिए एक समर्पित 'बोर्ड ऑफ ट्रेड' की स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं. गौरतलब है कि पिछले साल दोनों देशों के बीच टैरिफ को लेकर भारी तनाव देखा गया था, लेकिन अक्टूबर में दक्षिण कोरिया में हुई बैठक के बाद एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था. इसी समझौते के तहत, चीन ने दुर्लभ धातुओं के निर्यात पर प्रतिबंधों को रोका है, जबकि ट्रंप ने चीनी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की अपनी धमकी को वापस ले लिया है.


ताइवान का संवेदनशील मुद्दा और क्षेत्रीय सुरक्षा


बैठक के दौरान ताइवान का मुद्दा सबसे संवेदनशील बना रहा. राष्ट्रपति शी ने ट्रंप को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी कि ताइवान का प्रश्न चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर है. उन्होंने इसे "आग और पानी" जैसा मेल बताया और कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता और शांति एक साथ नहीं रह सकते. हालांकि, वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में ताइवान का जिक्र नहीं किया गया और ट्रंप ने भी इस पर पत्रकारों के सवालों से दूरी बनाए रखी. अमेरिका के लिए यह एक कूटनीतिक चुनौती है क्योंकि वह 'ताइवान संबंध अधिनियम 1979' के तहत द्वीप की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, जिसे बीजिंग अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है. ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया देते हुए चीन को क्षेत्रीय शांति के लिए एकमात्र खतरा बताया है.


ईरान युद्ध और वैश्विक संकट पर सहमति


मध्य पूर्व में जारी अस्थिरता और ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष पर भी दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चर्चा की. ट्रंप और शी जिनपिंग इस बात पर सहमत हुए कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखा जाना अनिवार्य है और ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए. अमेरिका को उम्मीद है कि चीन ईरान को तनाव कम करने के लिए मनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सहायता के बदले बीजिंग अमेरिका से अन्य क्षेत्रों, विशेषकर ताइवान के मुद्दे पर रियायतों की मांग कर सकता है. साल के अंत तक दोनों नेताओं की एपेक (APEC) और जी-20 सम्मेलनों में फिर से मुलाकात होने की संभावना है, जो इन चर्चाओं को आगे ले जाने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होंगे.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP