फर्जी FIR कर मां-बच्चे को जेल भेजने पर महिला आयोग सख्त
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने जनसुनवाई के दौरान कबीरधाम जिले के पिपरिया थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है. एक गंभीर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने पाया कि विभाग के ही एक आरक्षक और उसकी पत्नी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक पड़ोसी महिला, उसकी बहू और महज चार महीने के मासूम बच्चे को दो महीने तक जेल की सलाखों के पीछे रखा.
आयोग ने इसे सत्ता और वर्दी का घोर दुरुपयोग करार देते हुए राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण को एक महीने के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. साथ ही, डीजीपी से इन पुलिसकर्मियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने की बात भी कही है.
रायपुर में आयोजित 179वीं जनसुनवाई के दौरान भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल उठाए गए. आयोग ने प्रबंधन को फटकार लगाते हुए कहा कि बीएसपी अपने उन कर्मचारियों को संरक्षण देना बंद करे जो पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से भाग रहे हैं.
एक मामले में कर्मचारी के अवैध संबंधों और परिवार की उपेक्षा पर प्रबंधन की चुप्पी को आयोग ने महिलाओं के अधिकारों का हनन माना.
इसके अलावा, संपत्ति विवादों के मामलों में भी आयोग ने त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की. एक विधवा की बेटियों को उनका पैतृक हक दिलाने के लिए तहसील में नामांतरण के आदेश दिए गए, वहीं भारत माला परियोजना के मुआवजे से जुड़े विवाद में कलेक्टर को संबंधित बैंक खाते के लेन-देन पर तत्काल रोक लगाने की अनुशंसा की गई.
एक अन्य पारिवारिक विवाद में आयोग ने स्पष्ट किया कि स्टाम्प पेपर पर लिया गया तलाक अवैध है और प्रताड़ित महिला को ससुराल पक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का सुझाव दिया.