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POCSO केस निपटारे में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल

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01 जन. 2026, 02:41 PM 3 मिनट में पढ़ें 3

pocso chhattisgarh case
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नई दिल्ली । डेस्क: बच्चों के संरक्षण और न्याय की दिशा में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में एक मिसाल पेश की है. वर्ष 2025 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों को निपटाने में छत्तीसगढ़ पूरे भारत में पहले स्थान पर रहा है.


'इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन' की पहल 'सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रन' द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ ने निपटान दर (Disposal Rate) के मामले में दिल्ली जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है. जहाँ दिल्ली 178 प्रतिशत की निपटान दर के साथ दूसरे स्थान पर है, वहीं छत्तीसगढ़ ने इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है.

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प्रमुख बिंदु: न्याय की रफ्तार में छत्तीसगढ़ सबसे आगे


रिकॉर्ड निपटान दर: छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र ऐसा राज्य बनकर उभरा है जिसने पुराने लंबित मामलों को खत्म करने में सबसे अधिक सक्रियता दिखाई है.


बैकलॉग में कमी: रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में नए दर्ज मामलों की तुलना में पुराने मामलों को सुलझाने की गति कहीं अधिक रही, जिससे वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे बच्चों को राहत मिली है.


राष्ट्रीय औसत से बेहतर: राष्ट्रीय स्तर पर POCSO मामलों के निपटान की दर 109 प्रतिशत रही, जबकि छत्तीसगढ़ ने इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया.


रिपोर्ट 'पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन' के अनुसार, वर्ष 2025 में देश भर की अदालतों में कुल 80,320 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 87,754 मामलों का निपटारा किया गया. दिल्ली में 1,006 नए मामलों के मुकाबले 1,792 मामलों का निपटारा हुआ, जो कि 178 प्रतिशत की दर है. इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद दिल्ली, छत्तीसगढ़ के बाद दूसरे पायदान पर रही.


भले ही छत्तीसगढ़ और दिल्ली ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन रिपोर्ट में कुछ चिंताजनक पहलुओं पर भी ध्यान दिलाया गया है:


लंबे समय से लंबित मामले: देश में लगभग आधे POCSO मामले पिछले दो वर्षों से लंबित हैं.


पुराने मामलों का बोझ: दिल्ली में 54 प्रतिशत मामले पिछले 6 से 10 वर्षों से लंबित हैं.


रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि देशभर में बैकलाग खत्म करने के लिए 1,977 करोड़ रुपये की लागत से 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो (e-POCSO) अदालतें स्थापित की जानी चाहिए, जिसके लिए 'निर्भया फंड' का उपयोग किया जा सकता है.


"जब सिस्टम दर्ज होने वाले मामलों से अधिक का निपटारा करने लगता है, तो यह केवल इरादा नहीं बल्कि प्रभाव (Impact) बन जाता है. बच्चों को समय पर न्याय मिलना उनकी रिकवरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण है." पुरुजीत प्रहराज, निदेशक, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन (Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP