छत्तीसगढ़ में करोड़ों का धान खाने वाले चूहे की खोज जारी
कवर्धा । डेस्क: छत्तीसगढ़ की सियासत इन दिनों एक अनोखे मुद्दे पर गरमाई हुई है, जहां करोड़ों रुपये के धान की कमी को चूहों और दीमक के हवाले कर दिया गया है. कबीरधाम जिले के बाजार चारभाठा धान संग्रहण केंद्र से करीब 22 हजार क्विंटल से ज्यादा धान गायब होने का मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है. अनुमानित कीमत सात करोड़ रुपये बताई जा रही है, और प्रशासन की शुरुआती रिपोर्ट में इसका ठीकरा चूहों पर फोड़ा गया है.
इस मामले ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के प्रमुख अमित जोगी ने गुरुवार को खुद मोर्चा संभाला और बाजार चारभाठा केंद्र पहुंचकर प्रतीकात्मक रूप से 'मूसवा' (छत्तीसगढ़ी में चूहा) की तलाश शुरू की.
वे वहां मौजूद लोगों से पूछते रहे कि सात करोड़ का धान खाने वाला चूहा कहां है. मजाकिया अंदाज में उन्होंने चूहा पकड़ने पर 10 रुपये का इनाम भी घोषित कर दिया. उनके साथ पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद थे.
अमित जोगी ने केंद्र का दौरा करने के बाद वीडियो बनाकर विष्णु देव साय सरकार पर तीखा प्रहार किया. उन्होंने पोस्टर लहराते हुए कहा कि कबीरधाम और महासमुंद समेत कई जिलों में करोड़ों के धान गबन के पीछे सरकार के बड़े 'मुसवे' जिम्मेदार हैं. छोटे कर्मचारियों को फंसाने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि यह महाघोटाला है. जांच हुई तो गबन के आंकड़े और बढ़ेंगे.
उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की और कहा कि सिर्फ केंद्रीय एजेंसी से ही सच सामने आएगा. यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की गड़बड़ी का सबूत है.
इसके बाद जोगी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा. वे गेट पर धरने पर भी बैठ गए.
इससे पहले किसान कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विपणन विभाग के डीएमओ कार्यालय का घेराव किया था. वे चूहा पकड़ने का पिंजरा लेकर पहुंचे और अधिकारी को सौंपा.
जिला अध्यक्ष रवि चंद्रवंशी ने भाजपा सरकार पर पुराने नान घोटाले की याद दिलाते हुए आरोप लगाया कि सात करोड़ का धान गायब कर चूहों पर इल्जाम लगाना खुला भ्रष्टाचार है. उन्होंने एसआईटी जांच, एफआईआर और वसूली की मांग की, साथ ही उग्र आंदोलन की चेतावनी दी.
दरअसल, संग्रहण केंद्रों में रखे धान की कमी को चूहों और दीमक ने नष्ट कर दिया, ऐसा प्रशासन का दावा है. लेकिन विपक्ष इसे बहाना बता रहा है. कांग्रेस और जोगी कांग्रेस दोनों ही इसे बड़ा घोटाला करार दे रहे हैं.
राज्य में सत्ताधारी और विपक्ष के बीच यह मुद्दा अब जोर पकड़ चुका है, और 'चूहे' की तलाश राजनीतिक अखाड़े में जारी है.