विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक पास
विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक पेश
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में गुरुवार को छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक पास हो गया है. इस बिल के पास होते ही सदन में भाजपा के विधायकों ने जय श्री राम के नारे लगाए.
राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने गुरुवार को विधानसभा में 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक' पेश किया, जिसके बाद सियासी माहौल गर्म हो गया. सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य बलपूर्वक, प्रलोभन देकर, धोखाधड़ी या भ्रामक जानकारी के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है.
बिल पर चर्चा के बाद इसे पारित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन विपक्ष ने शुरुआत से ही इसका कड़ा विरोध किया. इसके बाद विपक्ष की अनुपस्थिति में इस बिल को पास किया गया.
गुरुवार को जैसे ही विधेयक पेश हुआ, नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसे जल्दबाजी में लाया गया कदम बताते हुए आपत्ति जताई. उनका कहना था कि इस तरह के कानून देश के कई राज्यों में पहले से लागू हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, इसलिए इसे बिना गहन चर्चा के पारित करना उचित नहीं होगा.
महंत ने सुझाव दिया कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, जहां इस पर विस्तार से विचार-विमर्श हो सके. उन्होंने यह भी कहा कि इसमें पूर्व न्यायाधीशों और सभी दलों के प्रतिनिधियों की राय शामिल की जानी चाहिए, ताकि कोई ऐसा फैसला न हो जिससे समाज में विभाजन बढ़े.
विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद सदन की कार्यवाही चला रहे धर्मलाल कौशिक ने बिल पेश करने की अनुमति दे दी. इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया. इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह वॉकआउट नहीं, बल्कि “विपक्ष का भागना” है.
सत्ता पक्ष का पक्ष
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब भी इसी तरह का कानून लागू किया गया था. उन्होंने इसे राजनीतिक विरोध बताया.
वहीं, विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि संविधान राज्य सरकारों को ऐसे कानून बनाने का अधिकार देता है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर कोई रोक नहीं लगाई है. उन्होंने कहा कि यह विधेयक पूरी तैयारी और विचार-विमर्श के बाद लाया गया है.
सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में विपक्ष ने SIR (मतदाता सूची पुनरीक्षण) से जुड़े मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव रखा. नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि राज्य में करीब 19 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इस पर अजय चंद्राकर ने इसे जनहित नहीं, बल्कि चुनावी मुद्दा बताया. इसको लेकर सदन में तीखी बहस और हंगामा हुआ, जिसके बाद विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया.
इसके अलावा, वीरता पदक विजेताओं को मिलने वाली सुविधाओं और सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई. भाजपा विधायक सुनील सोनी ने रायपुर के भाठागांव स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि पांच पद स्वीकृत होने के बावजूद केवल एक डॉक्टर ही मौजूद है. इस पर अजय चंद्राकर ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि बाकी डॉक्टर फिल्म धुरंधर पार्ट-2 देखने गए हैं, जिससे सदन में कुछ देर के लिए ठहाके भी लगे.
सरकार के अनुसार, यह नया विधेयक पहले से लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है. इस कानून को राज्य गठन के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था. नए प्रस्ताव में डिजिटल माध्यमों और आर्थिक प्रलोभनों के जरिए होने वाले धर्मांतरण को भी शामिल किया गया है.
सड़क पर विरोध
विधानसभा के बाहर भी इस विधेयक को लेकर विरोध देखने को मिला. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने लोकभवन के सामने विधेयक की प्रति जलाकर विरोध जताया. उन्होंने राज्यपाल से इस विधेयक को मंजूरी न देने और इसे वापस विधानसभा भेजने की मांग की.
अमित जोगी ने सरकार पर आरोप लगाया कि बिल को सत्र के अंतिम दिन पेश किया गया, ताकि विधायकों को इसे ठीक से पढ़ने और समझने का समय न मिल सके. उन्होंने इसे सरकार की जल्दबाजी और डर का संकेत बताया.
जोगी ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों के लिए समान रूप से बना है और यह विधेयक लोगों के मौलिक अधिकारों पर असर डाल सकता है. उनके अनुसार, इसमें 'प्रलोभन' की परिभाषा बहुत व्यापक रखी गई है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल किया गया है.
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे धार्मिक गतिविधियों को भी अपराध की श्रेणी में लाने का खतरा पैदा हो सकता है.