छत्तीसगढ़ में मनरेगा ढ़लान पर
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में मनरेगा से मिलने वाले काम के दिन कम होते जा रहें हैं. गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार को बढ़वा देने के लिये महात्मा गांधी नरेगा कार्यक्रम की शुरूआत की गई थी.
इससे ग्रामीणों को अपने गांव में ही या पास-पड़ोस में रोजगार मिलता है. जिससे ग्रामीणों की क्रय शक्ति भी बढ़ती है तथा वहां के बाजार में खरीदार आते हैं. महंगाई तथा बेरोजगारी को देखते हुये इसे साल-दर-साल बढ़ाना चाहिये. लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका उल्टा हो रहा है. यहां सृजित मानव दिवस कम हो रहा है.
छत्तीसगढ़ सरकार के आंकड़ों के अनुसार साल 2020-21 में 1840.87 लाख मानव दिवस सृजित किये गये थे. उसके बाद साल 2021-22 में 1692.25 लाख मानव दिवस सृजित किये गये थे. उसके बाद साल 2022-23 में 1325.09 लाख मानव दिवस सृजित किये गये थे.
इसके बाद साल 2023-24 में 1276.61 लाख मानव दिवस सृजित किये गये. जोकि लगातार कम होता जा रहा है. साल 2024-25 में इससे थोड़ा सा ही ज्यादा 1323.58 मानव दिवस सृजित किये गये. फिर भी यह साल 2020-21 के आंकड़ों से कम है.
व्यय राशि भी लगातार होती जा रही है. साल 2020-21 में 4,41,935.09 लाख रुपये व्यय किये गये थे जो लगातार साल 2023-24 तक गिरता गया. हां, साल 2024-25 में थोड़ा बढ़कर 4,10,182.47 लाख रुपये का व्यय हुआ. फिर भी यह साल 2020-21 के 4,41,935.09 लाख रुपयों से कम है.
मनरेगा क्या है
मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) भारत सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में लागू एक रोजगार गारंटी योजना है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करना है, जिससे उनकी आजीविका सुरक्षा बढ़ाई जा सके.
इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी को कम करना, ग्रामीण परिवारों को आजीविका सुरक्षा प्रदान करना, और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना. योजना के तहत, ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को सार्वजनिक कार्यों जैसे कि सड़कें, नहरें, तालाब, कुएं, जल संचयन, और सूखा राहत कार्यों में लगाया जाता है.
यदि 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो आवेदक बेरोजगारी भत्ता पाने का हकदार होता है.