छत्तीसगढ़: प्लास्टिक बोतलों में शराब, पर्यावरणविदों ने जताई चिंता
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् आलोक शुक्ला ने राज्य सरकार के नए आबकारी फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उनके अनुसार, यह कदम युवाओं को शराब की ओर आकर्षित करने वाला है, क्योंकि इससे आबकारी विभाग को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है.
आलोक शुक्ला का कहना है कि प्लास्टिक बोतलों में शराब बेचने से प्लास्टिक का उपयोग कई गुना बढ़ जाएगा, जिसकी भारी कीमत पर्यावरण और समाज को चुकानी पड़ेगी. उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की अपील की है.
छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने हाल ही में आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी प्रदान की है, जिसमें एक बड़ा बदलाव यह है कि अब शराब की बोतलें कांच की बजाय प्लास्टिक की होंगी. यह नियम अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगा. सभी शराब निर्माता कंपनियों को अपने उत्पाद प्लास्टिक पैकिंग में ही सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि कांच की बोतलों के बार-बार टूटने से सरकारी ठेकों पर बड़ा आर्थिक घाटा होता है, साथ ही कर्मचारियों और खरीदारों को चोट का खतरा रहता है. प्लास्टिक बोतलें इन समस्याओं का समाधान करेंगी और भंडारण, परिवहन तथा हैंडलिंग को भी सुगम बनाएंगी.