अवैध शराब के खिलाफ ग्रामीणों की अनूठी पहल
अवैध शराब के खिलाफ ग्रामीणों की लामबंदी
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में स्थित खपरी दरबार गांव ने अवैध शराब की बिक्री और बढ़ती नशाखोरी के खिलाफ एक अनूठा कदम उठाया है. इस गांव ने सरकारी सहायता या राजनीतिक हस्तक्षेप की प्रतीक्षा किए बिना, स्वयं की पहल पर पूर्ण शराबबंदी लागू कर दी है.
ग्रामीणों ने तीन दिनों तक चली लगातार बैठकों के बाद यह ऐतिहासिक फैसला लिया.
खपरी दरबार, जो अपनी शांत खेतों और मिट्टी के घरों के लिए जाना जाता है, अब एक सख्त सामुदायिक नियमावली के साथ शराब मुक्त हो चुका है. गांव में 14 सदस्यों वाली एक सतर्कता समिति गठित की गई है, जो गांववासियों द्वारा चुनी गई है और केवल गांव के प्रति जवाबदेह है.
इस समिति ने शराब बिक्री पर ₹20,000 का जुर्माना और बार-बार उल्लंघन करने वालों के लिए सामाजिक बहिष्कार जैसे कड़े नियम बनाए हैं. इसके अलावा, अवैध शराब बिक्री की विश्वसनीय जानकारी देने वालों को ₹5,000 तक का इनाम देने का प्रावधान भी किया गया है.
गांव के युवा मिथिलेश सिंह ने बताया, "हमारे गांव का नाम बदनाम हो रहा था. युवा और किशोर शराब की लत में फंसते जा रहे थे. हमने तीन दिनों तक सभी ग्रामीणों के साथ बैठकें कीं और गांव के भविष्य के लिए यह कठोर कदम उठाया."
एक अन्य युवा, अजय कुमार ने कहा, "यह फैसला अचानक नहीं लिया गया. वर्षों की उपेक्षा, शिकायतों पर ध्यान न देने और पुलिस के साथ साठ-गांठ की खुलेआम बातें करने वाले शराब माफियाओं के खिलाफ यह हमारा जवाब है. जब कानून हम तक नहीं पहुंचा, तो हमने खुद कानून बनाया."
ग्रामीणों का कहना है कि अनियंत्रित शराब बिक्री ने गांव के युवाओं को नशे की गर्त में धकेल दिया था, जिसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहा था. सरकारी उदासीनता से तंग आकर, गांववासियों ने स्वयं कार्रवाई करने का निर्णय लिया.
इस पहल का नेतृत्व लक्ष्मण निषाद, दीनदयाल जांगले, पन्नालाल साहू, नेहरू साहू, कमता बघेल, लकी नेताम, सरपंच तोरण साहू और अन्य ग्रामीण कर रहे हैं.
समिति के एक सदस्य ने कहा, "यह शराबबंदी केवल एक नियम नहीं है, बल्कि नशे से मुक्त जीवन जीने की हमारी इच्छाशक्ति का प्रतीक है."
शराबबंदी लागू होने के लगभग एक महीने बाद, ग्रामीणों ने बताया कि अवैध शराब की उपलब्धता ने उनके गांव को नशे का अड्डा बना दिया था, जिसे अब वे पूरी तरह बदलना चाहते हैं.
खपरी दरबार की यह पहल छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों, जैसे अंबिकापुर जिले के चैनपुर गांव, से प्रेरणा लेती है, जहां महिलाओं के नेतृत्व में शराब और तंबाकू पर प्रतिबंध लागू किया गया था.
छत्तीसगढ़ के खपरी दरबार का यह कदम न केवल स्थानीय समुदाय के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन रहा है.