HC: शिक्षक का यौन कृत्य गंभीर POCSO अपराध, केवल पेशेवर दुराचार नहीं
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा की आपराधिक अपील को खारिज कर दिया, और उनकी POCSO एक्ट, 2012 के तहत सजा को बरकरार रखा. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने नाबालिग पीड़िताओं के विश्वसनीय और सुसंगत बयानों को "स्टर्लिंग गवाह" माना, जो मामले को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त थे.
मामला मार्च 2019 में तब सामने आया, जब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रतिमा मंडलोई को लोरमी के एल.बी. गवर्नमेंट मिडिल स्कूल, बरेला में शिक्षक कीर्ति कुमार शर्मा के खिलाफ दुराचार की शिकायत की जांच करने का निर्देश मिला. जांच में खुलासा हुआ कि शर्मा, जो गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए नियुक्त थे, बिना अनुमति के कक्षा 7 में विज्ञान पढ़ाने जाते थे.
इस दौरान, उन्होंने कई छात्राओं के साथ छेड़छाड़ की, उनकी पीठ और छाती को अनुचित तरीके से छुआ, गुटखा और गुड़ाखू का सेवन किया, और छात्राओं के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया.
जांच के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट सौंपी गई, और जर्हागांव पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 294, 354, 354(A), POCSO एक्ट की धारा 9 और 10, और SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत FIR दर्ज की गई. जांच पूरी होने पर, विशेष POCSO कोर्ट, मुंगेली ने 2 मार्च 2022 को शर्मा को दोषी ठहराया और उन्हें दो साल, एक महीने और छह दिन की सजा के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया.
शर्मा के वकील मलय श्रीवास्तव ने अपील में तर्क दिया कि निचली अदालत का फैसला "मनमाना, गैरकानूनी और तथ्यों पर आधारित नहीं" था.
उन्होंने दावा किया कि कुछ गवाहों ने घटना न होने की बात कही थी, और अभियोजन पक्ष मामले को साबित करने में विफल रहा.
दूसरी ओर, राज्य के वकील जीतेन्द्र श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि दो पीड़िताओं के बयान स्पष्ट रूप से शर्मा के यौन उत्पीड़न की पुष्टि करते हैं, जिन्हें अन्य गवाहों और सबूतों ने भी समर्थन दिया.
हाईकोर्ट ने पीड़िताओं के बयानों को अहम माना. 12 वर्षीय पीड़िता ने बताया कि शर्मा ने कक्षा में उनकी पीठ को सहलाया, जबकि दूसरे ने कहा कि दोपहर के भोजन के समय शर्मा ने उनके शरीर को छुआ और उनकी असहजता पर जवाब दिया कि "उसे यह पसंद है."
इन बयानों को सहपाठी दीपिका मिरी और शिक्षिका उपासना गोपाल ने भी समर्थन दिया. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रतिभा मंडलोई ने अपनी जांच के निष्कर्षों की पुष्टि की.
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जिसमें राय संदीप @ दीपू बनाम दिल्ली सरकार (NCT) में "स्टर्लिंग गवाह" की परिभाषा, नवाबुद्दीन बनाम उत्तराखंड सरकार में POCSO अपराधों की गंभीरता, और हिमाचल प्रदेश बनाम श्रीकांत शेखर में यौन उत्पीड़न पीड़िता के बयान की विश्वसनीयता पर जोर दिया गया.
कोर्ट ने कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध "मानवता और समाज के खिलाफ अपराध" हैं, जिन्हें सख्ती से निपटाया जाना चाहिए.
हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि विशेष POCSO कोर्ट का फैसला सही और कानूनसम्मत था. अपील को खारिज करते हुए, कोर्ट ने कहा कि शर्मा ने अपनी सजा पूरी कर ली है और जुर्माना भी जमा कर दिया है.
यह फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के प्रति न्यायालयों की सख्ती को दर्शाता है.