हाईकोर्ट ने बाघ शिकार पर लिया स्वतः संज्ञान
HC ने बाघ शिकार पर लिया स्वतः संज्ञान, वन संरक्षक से हलफनामा मांगा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेवती वन रेंज, घुई, में एक बाघ का विच्छेदित शव पाए जाने और संगठित अवैध शिकार की ओर इशारा करने वाली कई समाचार रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया है. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरू की खंडपीठ ने इन घटनाओं को 'बहुत गंभीर प्रकृति' का बताया है. इसके अलावा तेंदुओं के शिकार पर भी हाईकोर्ट ने चिंता जताई है.
अदालत ने उन समाचार रिपोर्टों का संज्ञान लिया जिनमें बताया गया था कि मृत बाघ का शव सूजा हुआ पाया गया था और उस पर गंभीर चोटों के निशान थे, जिसमें गहरे काटने के निशान थे तथा उसके दांत और नाखून गायब थे.
अधिकारियों को पास से एक धारदार हथियार भी मिला था, जिस पर संदेह है कि इसका उपयोग बाघ के नाखून और दांत निकालने के लिए किया गया होगा. शिकार की आशंका पर, वन अधिकारियों ने आवश्यक सबूत इकट्ठा करने के लिए खोजी कुत्तों और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों को बुलाया था.
न्यायालय ने एक अन्य रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि बनबोद के वन गांव में एक वयस्क बाघ को बेरहमी से मार दिया गया था, जिसके शिकारी उसके पंजे, नाखून और जबड़े के दांत निकाल ले गए थे. इन घटनाओं ने सीधे तौर पर संगठित अवैध शिकार की ओर इशारा किया है. इन घटनाओं से आसपास के क्षेत्रों में दहशत फैल गई है.
हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि उसने पहले भी शिकार के एक अन्य मामले में स्वतः संज्ञान लिया था, और हाल ही में 10.12.2025 को राज्य ने न्यायालय को सूचित किया था कि शिकार का कोई नया मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है.
न्यायालय ने खंडपीठ के अवलोकन को रेखांकित करते हुए कहा कि, "ये घटनाएं बहुत गंभीर प्रकृति की हैं और हाल ही में, विद्वान राज्य वकील ने इस न्यायालय को सूचित किया था कि शिकार का कोई नया मामला सामने नहीं आया है."
इसके मद्देनज़र, न्यायालय ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-वन्यजीव वार्डन को निर्देश दिया है कि वे उपर्युक्त समाचार रिपोर्ट के संबंध में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें.
मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 दिसंबर की तारीख तय की गई है.