छत्तीसगढ़: पटवारी हड़ताल पर एस्मा की तैयारी, 150 को नोटिस और संघ अध्यक्ष निलंबित
धान खरीदी से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल गहरा गई है. सरकार द्वारा निलंबन और एस्मा की तैयारी के बावजूद पटवारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं मुख्यमंत्री ने काम पर लौटने की अपील की है.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी की तैयारियों पर पटवारियों की हड़ताल के कारण असर पड़ने लगा है. खबर है कि इसे देखते हुए राजस्व विभाग अब सख्त कदम उठाने के मूड में है और राज्य में एस्मा (ESMA) लागू करने की योजना बना रहा है.
इस प्रशासनिक रुख के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पटवारियों से काम बंद करने के बजाय बातचीत के अन्य माध्यमों का उपयोग करने और तुरंत काम पर वापस आने का आग्रह किया है.
दूसरी तरफ, पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भागवत कश्यप के निलंबन और 150 से अधिक आंदोलनकारी पटवारियों को जारी नोटिस के बावजूद कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. संघ के अध्यक्ष कमलेश तिवारी का कहना है कि पदाधिकारियों पर निलंबन और नोटिस के जरिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है, हालांकि एस्मा लगाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना उन्हें प्राप्त नहीं हुई है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की सख्त कार्रवाइयों से उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा.
रायपुर में शासकीय कार्रवाई के बीच पटवारियों ने तूता से हटने के बाद मठपुरैना स्थित हनुमान मंदिर परिसर को अपना नया आंदोलन स्थल बना लिया है. गुरुवार को पटवारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करके सरकार की कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया और भगवान से सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की.
पटवारियों की मांगें
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 13 अक्टूबर 2026 से जारी है. पटवारी संघ की प्रमुख मांगों में पीवी (PV) ऐप की जटिलताओं व गड़बड़ियों को दूर करने या हटाने की मांग, गिरदावरी (फसल सर्वे) की प्रक्रिया को सरल व व्यावहारिक बनाना तथा वरिष्ठता के आधार पर नियमित पदोन्नति की स्पष्ट व्यवस्था सुनिश्चित करना शामिल है.
इस हड़ताल के कारण राज्य भर के किसानों पर व्यापक असर पड़ा है. 15 नवंबर 2026 से शुरू होने वाली धान खरीदी से पहले डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पोर्टल पर अभिलेखों का सत्यापन और फसल क्षति का आकलन पूरी तरह से ठप हो गया है. इसके अलावा, किसानों और आम नागरिकों के नामांतरण, बंटवारा, गिरदावरी तथा आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण राजस्व संबंधी काम रुक गए हैं.
एस्मा (ESMA) क्या है?
बता दें कि एस्मा (ESMA) का पूरा नाम 'एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट' (Essential Services Maintenance Act) या 'आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून' है. यह भारतीय संसद द्वारा 1968 में बनाया गया एक विशेष कानून है, जिसका मुख्य उद्देश्य नागरिक जीवन और समाज की अनिवार्य या अति-आवश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से बनाए रखना है.
जब किसी विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल या कामबंदी से आम जनता का जनजीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा या सरकारी राजस्व से जुड़ी आवश्यक गतिविधियाँ प्रभावित होने लगती हैं, तब सरकार स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए एस्मा लागू करती है.
एस्मा लागू होते ही संबंधित विभाग या क्षेत्र के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर जाना पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित हो जाता है. इस कानून की अधिसूचना जारी होने के बाद पुलिस प्रशासन के पास हड़ताल पर रहने वाले या अन्य सहयोगियों को आंदोलन के लिए उकसाने वाले कर्मचारियों को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार करने का कानूनी अधिकार होता है.
एस्मा के प्रावधानों के उल्लंघन पर आरोपी कर्मचारियों को छह महीने तक की जेल, जुर्माना अथवा दोनों प्रकार की सजा का सामना करना पड़ सकता है. यह कानून सामान्यतः अधिकतम छह महीने की अवधि के लिए लागू किया जा सकता है और राज्य सरकारें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार इसमें संशोधन करके इसे प्रभावी ढंग से लागू करती हैं.