छत्तीसगढ़: दिसंबर से 200 यूनिट तक बिजली बिल आधा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार ने घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने मंगलवार को कहा कि 'हाफ इलेक्ट्रिसिटी बिल' योजना को 100 यूनिट से बढ़ाकर 200 यूनिट तक विस्तारित किया जाएगा. यह लाभ एक दिसंबर से लागू हो जाएगा, जिससे राज्य के 45 लाख में से 42 लाख से अधिक परिवारों को फायदा मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने पुरानी विधानसभा भवन को विदाई देने वाले विशेष एकदिवसीय सत्र के दौरान यह ऐलान किया. उन्होंने बताया कि राज्य भाजपा प्रमुख की मांग पर यह निर्णय लिया गया है, ताकि उपभोक्ताओं के लिए यह दिन यादगार बने. "पहले 100 यूनिट तक आधा बिल का लाभ था, अब इसे 200 यूनिट तक बढ़ा दिया गया है," साई ने कहा. योजना के तहत, मासिक 400 यूनिट तक बिजली खपत वाले घरों को पहले 200 यूनिट पर आधा बिल देना होगा. 200 यूनिट तक के उपभोक्ताओं का बिल लगभग आधा रह जाएगा, जबकि 200 से 400 यूनिट के बीच वाले पहले 200 यूनिट पर ही आधा लाभ पाएंगे और बाकी पर पूर्ण शुल्क देंगे.
मुख्यमंत्री ने रूफटॉप सोलर प्लांट्स की बढ़ती मांग का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अब तक एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और 12,000 से ज्यादा सोलर प्लांट लगाए जा चुके हैं. "हमारा लक्ष्य हर उपभोक्ता को सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराना है," साई ने जोर दिया. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम पर 15,000 रुपये और 2 किलोवाट या इससे अधिक पर 30,000 रुपये की सब्सिडी जारी रहेगी. उन्होंने कहा, "यह कदम आधे बिल से आगे बढ़कर सोलर के जरिए वास्तविक मुफ्त बिजली की दिशा में ले जाएगा, जिससे बिल कम होंगे और छत्तीसगढ़ ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेगा."
यह घोषणा चार महीने पहले अगस्त 2025 में लिए गए फैसले के बाद आई है, जब साई सरकार ने आधा बिल सीमा को 400 यूनिट से घटाकर 100 यूनिट कर दिया था. इससे लाखों घरों के बिलों में भारी इजाफा हुआ था, जो पूर्व कांग्रेस सरकार की योजना से अलग था. मूल 'हाफ बिल' योजना तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार ने एक मार्च 2019 को शुरू की थी, ताकि बढ़ती लागत से उपभोक्ताओं को राहत मिले.
कांग्रेस ने इस कदम को अपर्याप्त और राजनीतिक रंग का बताया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने विपक्ष के मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन मार्च की घोषणा के बाद ही यह फैसला लिया. उन्होंने कहा कि यह जनहित से ज्यादा चुनावी लाभ के लिए है.