छत्तीसगढ़ में विकास दर 8% से अधिक रहने का अनुमान
रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ का विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है. विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि राज्य की विकास दर 8 प्रतिशत से अधिक रहने का अनुमान है. सर्वेक्षण के अनुसार, स्थिर कीमतों (आधार वर्ष 2011-12) पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) में 8.11 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि चालू कीमतों पर यह वृद्धि दर 11.57 प्रतिशत रह सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में राज्य की GSDP स्थिर कीमतों पर बढ़कर 3,58,293 करोड़ रुपये और चालू कीमतों पर 6,31,291 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है.
सबसे अहम बात यह है कि चालू कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय 1,79,244 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 1,62,848 रुपये थी. यानी प्रति व्यक्ति आय में लगभग 10.07 प्रतिशत की वृद्धि संभावित है.
आर्थिक सर्वेक्षण में राज्य की प्रगति को तीन मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है-कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (कृषि, पशुपालन, वानिकी, मत्स्य) : 7.49% वृद्धि, उद्योग क्षेत्र (खनन, निर्माण, विनिर्माण, बिजली, गैस, जल आपूर्ति) : 7.21% वृद्धि और सेवा क्षेत्र : 9.11% वृद्धि.
इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्याण पर रहेगा फोकस
सत्र शुरू होने से पहले विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई. बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, डिप्टी सीएम अरुण साव सहित मंत्रीगण और सदस्य उपस्थित रहे.
बताया गया कि इस बार का बजट सुशासन, बुनियादी ढांचे, तकनीक और उद्योग पर केंद्रित होगा. युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएंगी. जिलों में नालंदा लाइब्रेरी, शहरों में स्टेडियम और रिंग रोड निर्माण की योजना है.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. पीएम सूर्यघर और आयुष्मान योजना के लिए भी बजट में बड़े प्रावधान प्रस्तावित हैं.
लखमा की एक साल बाद सदन में वापसी
शराब घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा लगभग एक वर्ष तक जेल में रहे, जिसके कारण वे सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं हो सके. 3 फरवरी को उच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्हें सशर्त रूप से सत्र में भाग लेने की अनुमति दी गई है.
विधानसभा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उन्हें सदन में आने-जाने की पूर्व सूचना देनी होगी. उनकी गतिविधियां केवल विधानसभा परिसर तक सीमित रहेंगी और वे अपने निवास क्षेत्र का दौरा या किसी राजनीतिक कार्यक्रम में भाग नहीं ले सकेंगे.
सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि वे अपने खिलाफ चल रहे मामले पर किसी प्रकार का बयान नहीं देंगे. यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ तो अनुमति तत्काल रद्द कर दी जाएगी.
दो अहम विधेयक भी प्रस्तावित
सत्र के दौरान छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 और छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन विधेयक, 2026 पेश किए जाने की संभावना है. इन विधेयकों पर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं.
बजट सत्र के लिए अब तक 2813 प्रश्नों की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं, जिनमें 1376 तारांकित प्रश्न शामिल हैं. इसके अलावा 61 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, नियम 139 के तहत 1 अविलंबनीय चर्चा, 13 अशासकीय संकल्प, शून्यकाल की 9 सूचनाएं और 112 याचिकाएं भी मिली हैं.
स्पष्ट है कि वित्तीय और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से यह सत्र बेहद महत्वपूर्ण है. आगामी एक माह तक राज्य की राजनीति का केंद्र विधानसभा ही रहेगी, जहां सरकार अपनी प्राथमिकताएं पेश करेगी और विपक्ष उसे कठघरे में खड़ा करने की तैयारी में है.